पल्स ऑक्सीमीटर क्या है? Pulse oximeter kya hai?

पल्स ऑक्सीमीटर क्या है? What is pulse oximeter in hindi?

फ्रेंड्स हम सभी जान रहे है कि अभी कोरोना महामारी का दौर चल रहा जिस कारण बहुत से लोग इसके चपेट में आ रहे है। ज्यादा संख्या में तो लोग इससे रिकवर हो जा रहे है पर कुछ की जाने भी जा रही है। इस महामारी में स्थति ऐसी हो गयी कि हॉस्पिटल में लोगों को जगह तक नहीं मिल पा रही है क्योंकि अचानक बहुत सारे लोग इससे संक्रमित हो रहे है। यह एक वायरस जनित रोग होने के कारण एक-दूसरे में फैलने के चान्सेस ज्यादा रहते है, इसलिए जहाँ तक हो सके हमें घर में रहने तथा एक दूसरे के बीच दुरी बना के रहने की सलाह दी जारी है।

जो लोग कोरोना वायरस से प्रभावित होकर गंभीर स्थति में चले जा रहे है उन्हें हॉस्पिटल में शिफ्ट कर उनका इलाज किया जा रहा है, और जो लोग इससे संक्रमित होते हुए सामान्य अवस्था में है उन्हें Home Isolation में ही रहने की सलाह दी जा रही है और उन्हें दवाई वगेरह सब घर पर ही मुहैया करवाया जा रहा है।

जैसा की Medical Department का कहना है कि कोरोना वायरस मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित कर रही है जिस कारण जिनकी स्थति ज्यादा ख़राब हो जा रही है उनका फेफड़ा सही से काम नहीं कर पा रहा है जिससे मरीजों के शरीर में Oxygen Saturation सही से नहीं हो पाता है ओर मरीज के शरीर में ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है, इसलिए उन्हें अलग से यानि External Source से Oxygen देने की जरुरत पड़ रही है।

इसलिए जो लोग Home Isolation में अपना इलाज कर रहे है उन्हें अपनी स्थति पर नजर रखने के साथ-साथ, समय-समय पर अपना Oxygen Level चेक करने की सलाह दी जा रही है, जिसके लिए अपने पास हमेशा एक Medical Instrument रखने को कहा जा रहा है जिसका नाम है "Pulse Oximeter" जो एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस होता है।

ऐसे में Pulse Oximeter आज-कल काफी चर्चे में है तथा इसकी डिमांड भी बहुत ही ज्यादा बढ़ गयी है। जिस कारण बहुत से लोग जिन्हें इसके बारे पता नहीं हैं कि "पल्स ऑक्सीमीटर क्या होता है" वे लोग इसके बारे में जानना चाह रहे है। इसलिए आज हमलोग इस टॉपिक में पल्स ऑक्सीमीटर के बारे में ही चर्चा करने जा रहे है। तो चलिए शुरू करते है....
  

पल्स ऑक्सीमीटर क्या है? Pulse oximeter kya hai?
Pulse Oximeter Kya Hai

पल्स ऑक्सीमीटर एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक्स फिंगर टिप डिवाइस है जो शरीर में मौजूद Oxygen Level तथा Pulse Rate बताने का काम करता है, इसलिए इसे Pulse Oximeter कहा जाता है। इससे यह पता लगाया जाता है कि शरीर में Oxygen Saturation का लेवल क्या है उसी के आधार पर तय किया जाता है कि पेशेंट को एक्सटर्नल ऑक्सीजन देने की जरुरत है या नहीं।

यह अंगुली में लगाकर उपयोग किया जानेवाला वाला डिवाइस होता है जिससे किसी भी प्रकार का कोई दर्द या चुभन नहीं होता है। इसके ऊपर एक डिजिटल डिस्प्ले लगी होती है जिसपर Oxygen Level और Pulse Rate का Reading Show होता है। इस डिवाइस का इस्तेमाल कोई भी व्यक्ति आसानी से कर सकता है तथा इसके ऊपर डिस्प्ले पर Show हो रही Reading को आसानी से पढ़ तथा समझ सकता है।

पल्स ऑक्सीमीटर कैसे कार्य करता है? Pulse oximeter kaise karya karta hai?

पल्स ऑक्सीमीटर कैसे कार्य करता है इसे जानने से पहले हमें ये समझना जरूरी होगा कि हमारे शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो कैसे होता है....

हम सभी को पता है कि ऑक्सीजन हमें जीवित रहने के लिए बहुत ही जरुरी है इसलिए इसे प्राण वायु भी कहा जाता है, और इसे हम सब सामान्य अवस्था में अपने वायुमंडल से अपने नेचुरल एयर को साँस के द्वारा अंदर लेकर प्राप्त करते है। ऑक्सीजन हमारे शरीर के हर एक हिस्से को चाहिए होता है, इसलिए स्वसन क्रिया के दौरान ऑक्सीजन नेचुरल एयर के साथ हमारे फेफड़ो से होते हुए धमनी जिसे अंग्रेजी में Arteries कहा जाता है, में चला जाता है और धमनी में फ्लो होनेवाले ब्लड के साथ मिलकर एक जगह से दूसरे जगह एक-एक सेल्स में जाता है।

हमारे शरीर के हर एक हिस्सों में ऑक्सीजन पहुँचाने का काम हमारे शरीर के Arteries में फ्लो हो रही खून में मौजूद Hemoglobin करती है जो RBC-Red Blood Cells में पाया जाता है अर्थात RBC Oxygen Carrier का काम करता है जो Hemoglobin ऑक्सीजन के साथ फ्लो हो रही होती है उसे Oxygenated Hemoglobin तथा जो Hemoglobin बिना ऑक्सीजन के फ्लो हो रही होती है उसे Deoxygenated Hemoglobin कहा जाता है।

Oxygenated और Deoxygenated Hemoglobin की संख्यां के आधार पर ही खून में Oxygen Saturation का पता लगाया जाता है जो प्रतिशत में होता है जिसे SpO2 Parameters से प्रदर्शित किया जाता है।

हमारे शरीर में SpO2 का Level कितना है यह इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे Arteries में फ्लो हो रही खून में Oxygenated Hemoglobin की प्रतिशत (%) कितनी है अर्थात 100 Hemoglobin पार्टिकल में Oxygenated Hemoglobin पार्टिकल की संख्यां कितनी है।

मेडिकल साइंस के अनुसार एक स्वस्थ्य मनुष्य के शरीर में SpO2 यानि Oxygen Level 94% ↑ से ऊपर होना चाहिए अर्थात 100 हीमोग्लोबिन में 94 से ज्यादा हीमोग्लोबिन Oxygenated होना चाहिए।


अब बात आती है कि Pulse Oximeter हमारे शरीर के SpO2 Level को कैसे मापता है?
Pulse Oximeter Kaise Karya Karta Hai

पल्स ऑक्सीमीटर की तकनीक हमारे शरीर के SpO2 Level नापने के लिए Infrared Light तथा Red Light का सहारा लेती है।

हम सभी जान चुके है कि शरीर की SpO2 Level जानने के लिए धमनी में फ्लो होनेवाली Oxygenated Hemoglobin की प्रतिशत को नापा जाता है। पल्स ऑक्सीमीटर भी कुछ ऐसा ही करता है।

हमको पता होना चाहिए की Oxygenated Hemoglobin हमेशा Infrared Light को Absorb करता है और Red Light को Pass करता है, Deoxygenated Hemoglobin हमेशा Red Light को Absorb करता है और Infrared Light को Pass करता है। इसी Pass और Absorption के आधार पर SpO2 की डाटा बनती है।

पल्स ऑक्सीमीटर की बनावट इस प्रकार होती है कि जब इसे अंगुली के ऊपर लगाएं तो हमारे अंगुली के नाख़ून वाले हिस्से के ऊपर IR और Red Led आ जाये जो इसका Transmitter Side होता है और इसके निचले हिस्से पर Photo Detector लगा होता है जो इसका Receiver Side होता है।

अब SpO2 तथा Pulse Rate चेक करने के लिए जैसे ही इसे On करते है तो IR और Red Led Glow होती है और हमारे अंगुली के Blood Cells से होते हुए Pass होती है।

अब कितनी लाइट Hemoglobin में Absorb हुई और कितनी लाइट Hemoglobin से Pass होकर Photo Detector तक पहुंची उसी के आधार पर Raw Data रिसीवर से पल्स ऑक्सीमीटर में लगी Microcontroller को जाता है जहाँ उसमे डाले गए प्रोग्राम के अनुसार उसपर Calculation होती है और Display पर Reading Show होता है।

Pulse Rate भी उसी Data के आधार पर कैलकुलेशन हो जाता है क्योंकि Heart Beat के गति अनुसार Blood Pressure भी कम ज्यादा होता रहता है जिससे Raw Data से बनने वाले Wave Amplitude हार्ट बीट के अनुसार High और Low होती है जिसको कैलकुलेशन करके PR Value दिखाया जाता है।  सामान्य अवस्था में Adult मनुष्य का Normal Pulse Rate 60 से 100 Pulse प्रति मिनट होता है।

SpO2 और Pulse Rate के अलावा पल्स ऑक्सीमीटर में एक और Value दिखाया जाता है जिसे PI Parameters से इंडीकेट किया जाता है। PI का पूरा मतलब होता है Perfusion index. संक्षेप में कहें तो PI, Pulse Strength (पल्स ताकत) मापने का एक पैरामीटर है जिसमे Pulsatile blood flow और Non-Pulsatile blood flow के Ratio को बताया जाता है जो प्रतिशत में होता है। इससे यह पता चलता है कि धमनी में रक्त का प्रवाह कितनी ताकत से हो रही है। PI की कोई एक निश्चित वैल्यू नहीं है इसलिए PI की Percentage जो  0.02% से लेकर 20% तक होता है, के आधार पर Weak Pulse और Strong Pulse का पता लगाया जाता है। PI Value 0.02% को बहुत ही कमजोर पल्स माना जाता है और PI Value 20% को बहुत ही मजबूत पल्स माना जाता है, इसी बीच में एक सामान्य मनुष्य की PI Value होती है।
Perfusion Index मनुष्य के शारीरिक स्थति और मोनिटरिंग इंस्ट्रूमेंट के आधार पर भी भिन्न हो जाती है, इसलिए पल्स ऑक्सीमीटर के केस में PI को 0.4 % पर ही न्यूनतम अर्थात कमजोर पल्स माना जाता है।

पल्स ऑक्सीमीटर की विशेषताएं? Pulse oximeter ki visheshtayen?

  • पल्स ऑक्सीमीटर की विशेषताओं की बात करें तो इसकी बहुत सारी विशेषताएं हो सकती है, जैसे-
  • यह एक पोर्टेबल डिवाइस होता है जिस कारण इसे हम अपने एक पॉकेट में रखकर कहीं भी कैरी कर सकते।
  • इसको लगाना बहुत ही आसान है, इसे लगाने के लिए हमें किसी प्रोफेशनल या टेक्निकल पर्सन की जरुरत नहीं पड़ती है।
  • इसके डिस्प्ले में दिखाए जानेवाले रीडिंग को कोई भी आसानी से समझ सकता है।
  • इसका इस्तेमाल करना आसान होने के कारण जिस भी पेशेंट का इलाज डॉक्टर के निर्देशानुसार घर पर किया जा रहा हो उसका SpO2 लेवल भी पता मिनटों में लगाकर अपने डॉक्टर को फीडबैक दिया जा सकता है।
  • जिन पेशेंट की ऑक्सीजन लेवल हमेशा Up↑ Down↓ होते रहती है उसके लिए कहीं भी At a time SpO2 Level चेक करने का एक अच्छा साधन है।
  • इसको चलने के लिए कोई बड़ी पावर सोर्स की जरुरत नहीं पड़ती है क्योंकि इसमें छोटी सी बैटरी भी लगी होती है।
  • यह बहुत ही सस्ते प्राइस में कहीं भी उपलब्ध हो जाती है।

पल्स ऑक्सीमीटर की खामियां? Pulse oximeter ki khamiyan?

  • इसकी सबसे बड़ी Disadvantage (खामियां) यह है कि कभी-कभी हम और आप जैसे लोगों के पास वैसे पल्स ऑक्सीमीटर हाथ लग जाते है जो कई बार सही रीडिंग बताने के बजाय डिस्प्ले पर गलत रीडिंग शो करते है, जो कतई सही नहीं है, इससे जान को खतरा हो सकता है।

    हालाँकि बहुत ऐसे प्रोडक्ट है जो ओरिजिनल रीडिंग दिखाते है पर कुछ ऐसे भी सस्ते प्रोडक्ट है जो कई बार गलत रीडिंग दिखाते है।

    इसलिए सस्ते के चक्कर में ना जाएँ बल्कि पल्स ऑक्सीमीटर हमेशा किसी अच्छे और विश्वसनीय ब्रांड का ही खरीदें या इसे लेने से पूर्व किसी प्रोफेशनल से इसके बारे में पता कर लें।
Conclusion:-
फ्रेंड्स हमें उम्मीद है कि Pulse Oximeter के बारे में लिखी गयी यह आर्टिकल आपको पसंद आई होगी परंतु मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि हमारे द्वारा लिखी गयी यह आर्टिकल आपको कैसी लगी इसकी प्रतिक्रिया तथा इससे संबंधित कोई सवाल या सुझाव हमें कमेंट के माध्यम से जरूर दें। अगर यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो अपने फ्रेंड सर्किल में अधिक-से अधिक शेयर करें। इसी तरह की और भी टेक्नोलॉजिकल आर्टिकल पढ़ना चाहते है तो Comtech In Hindi से जुड़े रहें। धन्यवाद!