पेसमेकर क्या है? Pacemaker kya hai? पूरी जानकारी हिंदी में?

पेसमेकर क्या होता है? What is pacemaker in hindi?

फ्रेंड्स जैसा की हम लोगों को कई बार सुनने को मिलता है कि किसी व्यक्ति के हार्ट में प्रॉब्लम हुई थी जिस कारण उसके हार्ट में एक पेसमेकर नाम की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाया गया है फिर वो आदमी सामान्य अवस्था में आ चुका है। बात आती है की आखिर ये पेसमेकर है क्या?

मैं बताते चलूँ की कई लोगों को खास करके मेडिकल डिपार्टमेंट से जुड़े लोगों को तो इस डिवाइस के बारे में अच्छी तरह पता होता है, परंतु बहुत ऐसे भी लोग जिन्हें इसके बारे में पता तो नहीं होता है पर वह इसके बारे में जानना चाहते है। अगर आप भी पेसमेकर के बारे में जानने के लिए यहाँ तक आये है तो आप सही जगह है क्योंकि आज हमलोग इस टॉपिक में जानकारी के लिहाज से Pacemaker के बारे में ही चर्चा करने जा रहे है इसलिए आपसे आग्रह है कि पूरी आर्टिकल को ध्यानपूर्वक पढ़ें....

पेसमेकर क्या है? Pacemaker kya hai?

What is pacemaker in hindi?

हम सभी को पता है की आमतौर पर इन्सान के हार्ट की गति (Heart Beat Rate) 60 से 100 Beat प्रति मिनट के बीच होती है जो एक Normal Heart Beat Rate है। जब हार्ट यानि दिल की धड़कन अर्थात Heart Beat सामान्य रूप में धड़कने के बजाय असामन्य रूप में धड़कने लगता है तो मनुष्य को कई तरह की समस्यओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हार्ट बीट को को संतुलन में लाने के लिए सर्जरी करके मनुष्य के दिल में एक छोटा सा डिवाइस लगाया जाता है जिसे पेसमेकर कहा जाता है।

पेसमेकर एडवांस टेक्नोलॉजी पर निर्मित एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक्स या कहें तो Computerized Device होता है, जो हार्ट यानि हृदय की गति और लय बनाए रखने के लिए Heart Muscles में Electrical Impulse भेजता है जिससे असामान्य Heart Beat सामान्य हो जाता है।

पेसमेकर के दो भाग होते हैं जिनमे से एक भाग जिसे Pulse Generator कहा जाता है जिसमे बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स लगे होते हैं जो दिल की धड़कन को नियंत्रित करने के लिए Electric Impulse Generate करते हैं, यह हिस्सा Collar Bone के निचे सर्जरी करके लगाया जाता है। दूसरा हिस्सा दिल को Electrical Impulse भेजने के लिए एक या एक से अधिक लगे Electrode Lead होते है जो एक इंसुलेटेड तार की तरह होते हैं जिसके माध्यम से Impulse पल्स जनरेटर से दिल तक जाते हैं, Lead का एक शिरा पल्स जनरेटर में लगाया जाता है और दूसरा शिरा Large Vain से होते हुए सीधे हृदय तक जाता है।

पेसमेकर कितने तरह के होते है? Pacemaker kitne prakar ke hote hai?

पेसमेकर मुख्यतः तीन तरह के होते है:-

Single Chamber Pacemakers:

सिंगल चैंबर पेसमेकर में केवल एक लीड लगी होती है जो आमतौर पर पल्स जनरेटर से भेजे जानेवाली इलेक्ट्रिक इम्पल्स को हृदय के दाहिने निलय (Right Ventricle) में पहुँचाता है और ह्रदय की गति को नार्मल करने का काम करता है।

Dual Chamber Pacemakers:

ड्यूल चैम्बर पेसमेकर में दो लीड लगी होती है जो दाएँ अलिंद और दाएँ वेंट्रिकल के दोनों कक्षों से जुड़ता है। इसका एक लीड पल्स जनरेटर से भेजे जानेवाली इलेक्ट्रिक इम्पल्स को दाएँ अलिंद (Right Atrium) में और दूसरा लीड दाएँ वेंट्रिकल (Right Ventricle) में पहुँचाने का काम करता है, जिस कारण यह पेसमेकर दो कक्षों को एक साथ काम कराने में मदद करता है और रक्त को दाएं आलिंद से दाएं वेंट्रिकल में ठीक से बहने देता हैं।

Biventricular Pacemaker:

बाइवेंट्रिकुलर पेसमेकर में तीन लीड लगी होती है जो दाहिने अलिंद और बाएं-दाहिने दोनों निलय के साथ जुड़ता है, इसका तीनो लीड तीनो जगह इलेक्ट्रिक इम्पल्स को पहुँचाने का काम करता है। इस पेसमेकर का उपयोग विशेष कंडीशन में Heart Failure वाले रोगी के हार्ट को नॉर्मली काम करने के लिए लगाया जाता है।
Heart Failure वाले कई लोगों के दिल के बाएं और दाएं वेंट्रिकल एक ही समय में पंप नहीं कर सकते हैं इसलिए डॉक्टर वेंट्रिकल्स के संकुचन को सामान्य करने के लिए बायवेंट्रिकुलर पेसमेकर को प्रोग्राम करते हैं ताकि वे दोनों एक साथ पंप करें।

पेसमेकर कैसे काम करता है? Pacemaker kaise kaam karta hai?

पेसमेकर के कार्यशैली को जानने से पहले हमें यह जान लेना आवश्यक है की हमारा ह्रदय (Heart) कैसे काम करता है। ह्रदय की बात करें तो यह हमारे शारीर का एक महत्वपूर्ण पंप होता है जो हमारे पुरे शारीर में हमेशा Blood Circulate करने का काम करता है और Blood का Circulation सामान्य रूप से तभी हो पाता जब हमारा ह्रदय सामान्य रूप से कार्य कर रहा होता है। हमारा ह्रदय हमेशा धडकता रहता है जिसकी सामान्य गति 60 से 100 Heart Beat प्रति मिनट होता है।

हमारे हार्ट को प्रॉपर Beating (Contract & Relax) कराने के लिए ईश्वर ने हमारे हार्ट के अंदर दो ऐसे स्पेशल पार्ट दिए होते है जो Electric Impulse Generate करता है, इन पार्ट को SA Node (sinoatrial Node) तथा AV Node (Atrioventricular Node) कहा जाता है। अगर यदि इन दोनो पार्ट से Proper Electric Impulse हार्ट को मिल रहे होते है तो हमारा हार्ट सामान्य रूप से Beating करता है और यही Impulse जब असामान्य रूप से बनने लगता है तब हार्ट की Beating Rate Abnormal हो जाती है और मनुष्य को कई तरह की परेशानी होने लगती है। ऐसे में प्रॉपर Electric Impulse बनाने के लिए डॉक्टर हमारे हार्ट में पेसमेकर नाम की एक डिवाइस (जो एक बैटरी चलित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होते) सर्जरी करके इम्प्लांट करते है और जब यह डिवाइस लगा दिया जाता है तो हार्ट को कृत्रिम Electric Impulse मिलने लगता है जिससे हार्ट पुनः प्रॉपर काम करने लगता है।

ये पेसमेकर अपना काम हमेशा नहीं करते है बल्कि जब-जब हार्ट में बनने वाली Natural Electric Impulse फेल करती है तब-तब उस कंडीशन को डिटेक्ट करके ये पेसमेकर अपना कार्य करती है और एक Artificial Electric Impulse जेनेरेट करके हार्ट को देती है जिससे हार्ट सुचारू रूप से काम करता रहता है।

पेसमेकर क्या काम करता है? Pacemaker kya kam karta hai?

साधारण तौर पर कहें तो पेसमेकर हमारे हार्ट बनने वाली Natural Electric Impulse की जगह Artificial Electric Impulse बनाकर हार्ट को देने का काम करता है, जिससे हार्ट की रोगियों में उत्पन्न हुई Heart Beating प्रॉब्लम को दूर किया जाता है।

पेसमेकर कहाँ लगाया जाता है? Pacemaker kahan lagaya jata hai?

पेसमेकर को कॉलर बोन की त्‍वचा के नीचे और फैट टिशू के बीच लगाया जाता है और इसके लीड को नसों के जरिये हार्ट की मांसपेशियों तक पहुँचाया जाता है।

पेसमेकर कब लगाया जाता है? Pacemaker kab lagaya jata hai?

जब किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है या किसी कारण से Heart Beat असामान्य हो जाता है तो वैसे कंडीशन में Heart Beat को संतुलन में लाने के लिए डॉक्टर उस व्यक्ति के हार्ट में पेसमेकर लगाने की सलाह देते है।

Disclaimer: यह आर्टिकल पेसमेकर के बारे में केवल सामान्य जानकारी लोगों तक पहुँचाने के लिहाज से लिखी गयी है, किसी विशेष जानकारी को प्राप्त करने के लिए तथा कोई मेडिकेटेड एक्टिविटी में शामिल होने से पूर्व अपने डॉक्टर से संपर्क करें। हमारा उदेश्य आपको बहकाना नहीं है।

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Conclusion (निष्कर्ष):
हमें उम्मीद है की पेसमेकर के बारे में संक्षेप में लिखी गयी इस आर्टिकल के माध्यम से आपको पेसमेकर की बेसिक जानकारी अवश्य ही मिल गयी होगी फिर भी किसी प्रकार की कोई कंफ्यूजन हो तो कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। यह आर्टिकल आपको कैसी लगी इसकी फीडबैक अपने स्तर पर कमेंट के माध्यम से जरुर दें, आपकी फीडबैक ही आपके द्वारा पढ़े जानेवाले टॉपिक की गुणवत्ता तय करती है. साथ ही अगर यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो अपने फ्रेंड सर्किल में शेयर करें. Comtech In Hindi से जुड़े रहने के लिए.... धन्यवाद !