क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है | Cloud computing kya hai?

क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है? What is cloud computing in hindi?

फ्रेंड्स हम सभी लोग जान रहे है की कुछ दशक से कंप्यूटर और इंटरनेट के क्षेत्र में तकनिकी विकास काफी तेजी हो रहा है और इसके कार्य करने का दायरा भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, जिस कारण आज के समय में इन सभी तकनीक का उपयोग एक आम जिंदगी में भी किया जा रहा है। आज लगभग हर एक छोटे से बड़े कार्य के लिए हमें कंप्यूटर की जरुरत पड़ती है चाहे वह कार्य शार्ट टर्म के लिए हो या लॉन्ग टर्म के लिए और कार्य भी अलग-अलग तरह के होते है जिसके लिए हमें अलग-अलग क्षमता तथा रिसोर्स वाले कंप्यूटर की जरुरत पड़ती है। परंतु सभी के लिए यह संभव नहीं की हर एक अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग क्षमता तथा रिसोर्स वाले कंप्यूटर रखा जा सके। इन्ही सारी समस्याओं के समाधान के लिए तथा कार्यों को आसान एवं एक आम जन की पहुँच तक बनाने के लिए एक ऐसी तकनीक का विकास किया गया जिसका नाम Cloud Computing है जो इन्टरनेट आधारित कम्प्यूटेशनल प्रणाली पर कार्य करता है।
आज हमलोग इस टॉपिक में क्लाउड कंप्यूटिंग के बारे में ही विस्तृत रूप से चर्चा करने जा रहे है तो चलिए शुरू करते है......

क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है? Cloud Computing kya hai?

Cloud Computing kya hai

संक्षेप में कहें तो "उपयोगकर्ता के सीधे सक्रिय प्रबंधन के बिना कंप्यूटर सिस्टम तथा कंप्यूटर से जुड़े संसाधनों का ऑनलाइन इंटरनेट के माध्यम से जरुरत के अनुसार सारी कंप्यूटिंग शक्ति का उपयोग करने की प्रक्रिया को क्लाउड कंप्यूटिंग कहा जाता है"

विस्तृत रूप में हम इसे समझने का प्रयास करें तो- क्लाउड कंप्यूटिंग एक ऐसी सर्विस है जिसमे कोई एक सर्विस प्रोवाइडर के द्वारा कंप्यूटर के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर तथा इत्यादि प्रकार की सारी कंप्यूटिंग रिसोर्सेज को एक अलग लोकेशन में पूरी सुरक्षा तथा जिम्मेदारी के साथ रखते हुए ऑनलाइन इन्टरनेट के माध्यम से पूरी नेटवर्क में बड़ी-बड़ी आर्गेनाइजेशन से लेकर सुदूर बैठे एक सामान्य यूजर तक के लिए कंप्यूटिंग की सारी सर्विसेज तथा रिसोर्सेज को रेंट पर मुहैया कराया जाता है। जैसे- Google के द्वारा प्रोवाइड किया जानेवाला Google Drive जिसमे Cloud Storage की सुविधा होती है तथा Google के द्वारा ही प्रोवाइड किया जानेवाला Google Docs, Google Slides, Google Drawings, Google Forms Etc. जिसमे हमें कई तरह की एप्लीकेशन आधारित फइलें बनाने की सुविधा मिलती है, यही क्लाउड कंप्यूटिंग है जिसमे हमें अपने कंप्यूटर पर किसी भी प्रकार की एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर रखने की जरुरत नहीं होती है केवल एक इन्टरनेट ब्राउज़र तथा एक अच्छी हाई स्पीड इन्टरनेट कनेक्शन की जरुरत होती है।
चाहे बड़ी-बड़ी कोई सॉफ्टवेयर उपयोग करने की बात हो अथवा डाटा स्टोर करने की ये सभी क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विस बड़ी-बड़ी कंपनियों जैसे- Google, Microsoft, Amazon, Adobe इत्यादि के द्वारा ऑनलाइन प्रदान किये जा रहे है।

क्लाउड कंप्यूटिंग कितने प्रकार के होते है? Types of cloud computing in hindi?

Types of cloud computing in hindi 

क्लाउड कंप्यूटिंग डिप्लॉयमेंट तथा सर्विसेज के आधार पर अलग-अलग प्रकार के होते है:-

डिप्लॉयमेंट के आधार पर क्लाउड कंप्यूटिंग चार प्रकार के होते है:-

पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग (Public Cloud Computing)- 

ये कंप्यूटिंग सर्विस आम पब्लिक के लिए होते है जिसको मैनेज करने का काम सर्विस प्रोवाइडर कंपनी करती है. इस क्लाउड कंप्यूटिंग का रेंट बहुत ही कम होता है तथा इसके कुछ लिमिटेड फंक्शन के साथ इसका उपयोग कई सर्विस प्रोवाइडर के द्वारा फ्री दिए जाते है. चूँकि यह सेवा आम पब्लिक के लिए होती है इसलिए इसमें सिक्यूरिटी का खतरा ज्यादा रहता है. Amazon Web Service, Microsoft Azure तथा Google Cloud Platform पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग के उदहारण है।

प्राइवेट क्लाउड कंप्यूटिंग (Privet Cloud Computing)- 

ये कंप्यूटिंग सर्विस सामान्य रूप से आम पब्लिक के लिए नहीं होते है बल्कि ये कोई बड़ी कंपनी या कोई बड़ी आर्गेनाइजेशन के लिए होता है जो अपने खुद के डाटा सेंटर का निर्माण करके इसकी मैनेजमेंट खुद करना चाहती है. इस कंप्यूटिंग सेवा में High Security मिलती है तथा इसमें Customization एवं Scalability की पूरी स्वंतंत्रता मिलती है परन्तु यह पब्लिक क्लाउड की तुलना में महँगी सर्विस होती है।

कम्युनिटी क्लाउड कंप्यूटिंग (Community Cloud Computing)- 

यह कंप्यूटिंग सर्विस एक ऐसी सर्विस है जिसके कम्युनिटी स्तर पर अर्थात एक ग्रुप तक के उपयोग के लिए बनाये जाते है जिसमे केवल पुरे कम्युनिटी के consumer तक को ही एक्सेस दिया जाता है इसके अलावा इसमें बाहरी एक्सेस निषेध रहता है. इस कंप्यूटिंग सेवा का उपयोग ज्यादातर सरकारी दफ्तर, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी या कोई अन्य आर्गेनाइजेशन के द्वारा किया जाता है।

हाइब्रिड क्लाउड कंप्यूटिंग (Hybrid Cloud Computing)- 

यह कंप्यूटिंग सर्विस पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग तथा प्राइवेट क्लाउड कंप्यूटिंग का कॉम्बिनेशन होता है अर्थात यह दोनों का मिला जुला रूप होता है जिस कारण इसमें सभी तरह के सर्विसेज उपलब्ध हो जाते है. यहाँ से जरुरत के अनुसार अलग-अलग स्तर के क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विस मॉडल को प्राप्त किया जा सकता है। इस क्लाउड सर्विस के अन्दर सिक्यूरिटी बहुत ही हाई होती है तथा यह क्लाउड सर्विस अलग-अलग तरह के सभी क्लाइंट को ध्यान में रखकर बनाया जाता है ताकि हर एक के जरुरत को पूरा किया जा सके वो भी बिलकुल सुरक्षित। इस क्लाउड सर्विस का उपयोग एक सामान्य क्लाइंट से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनी तथा आर्गेनाइजेशन तक करती है।

सर्विसेज के आधार पर क्लाउड कंप्यूटिंग तीन प्रकार के होते है:-

Infrastructure as a Service (IaaS)-

Infrastructure as a Service एक बेसिक फंडामेंटल सर्विस है जो क्लाइंट को केवल इंफ्रास्ट्रक्चर (कंप्यूटर हार्डवेयर रिसोर्सेज) प्रदान कराती है. इस मॉडल में सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के द्वारा क्लाइंट को केवल हार्डवेयर रिसोर्सेज को ऑनलाइन क्लाउड पर वर्चुअल एक्सेस तथा कण्ट्रोल दिया जाता है जिसपर क्लाइंट खुद की अपनी जरुरत के अनुसार ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर इत्यादि इनस्टॉल करके उपयोग करती है जिसपर क्लाइंट का रिस्क रहता है. सर्विस प्रोवाइड की केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिस्क रहता है।
यह विभिन्न प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रदान कराती है जैसे- Server, Storage, Load Balancer इत्यादि।

Platform as a Service (PaaS)- 

यह एक ऐसा सर्विस मॉडल है जिसमे एक क्लाइंट को जरुरत के अनुसार एक अलग-अलग तरह के प्लेटफार्म को बिल्ड करके दिया जाता है. इस सर्विस को क्लाउड में ही होस्ट कर दिया जाता है. इस मॉडल में अलग-अलग तरह के कार्यों को मैनेज करने के लिए अलग-अलग तरह के एप्लीकेशन तथा टूल्स के साथ एक कम्पलीट प्लेटफार्म उपलब्ध कराती है जिसमे क्लाइंट को अलग से कोई अपनी रिसोर्सेज नहीं लगाना पड़ता है. पूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा रिसोर्स की जिम्मेदारी सर्विस प्रोवाइडर की होती है। क्लाइंट के लिए केवल एक सामान्य कंप्यूटर के साथ-साथ हाई स्पीड इन्टरनेट की आवश्यकता होती है।
यह सर्विस मॉडल ज्यादातर सॉफ्टवेयर तथा वेब डेवलपर इत्यादि के लिए उपयोगी रहते है।

Software as a Service (SaaS)- 

यह एक ऐसा क्लाउड सर्विस मॉडल है जिसमे क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर कंपनी सॉफ्टवेयर को क्लाउड में उपलब्ध कराती है. जिसमे सर्विस प्रोवाइडर द्वारा क्लाउड में ही एप्लीकेशन को होस्ट कर दिया जाता है जिसका एक्सेस इन्टरनेट पर यूजर को दिया जाता है. यह आज के समय में काफी प्रचलित सर्विस मॉडल है जिसका उपयोग भी बहुत ही ज्यादा किया जा रहा है. इसमें रेंट पर लिए गए किसी भी तरह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग करने की अनुमति होती है. SaaS मॉडल में सॉफ्टवेयर को अपडेट तथा मेंटेनेंस करने की सारी जिम्मेदारी सर्विस प्रोवाइडर की होती है। Adobe, Microsoft , Google जैसी बड़ी-बड़ी कंपनी इस सर्विस मॉडल को उपलब्ध करा रही है।

क्लाउड कंप्यूटिंग के उपयोग? Application of cloud computing in hindi?

वैसे सामान्य तौर पर आज हर एक इन्सान जाने अनजाने में क्लाउड कंप्यूटिंग का ही उपयोग कर रहा है परन्तु यहाँ कुछ इम्पोर्टेन्ट क्लाउड कंप्यूटिंग के उपयोग का उदहारण दिया गया है.....
  • Cloud Data Storage के लिए।
  • Website Hosting के लिए।
  • Software Development के लिए।
  • Cloud Database Management के लिए।
  • Cloud Software Service के लिए।

क्लाउड कंप्यूटिंग की विशेषताएं तथा फायदे? Advantage & benefit of cloud computing in hindi?

  • इस तकनीक में End User को कोई विशेष तकनिकी झंझट का सामना नहीं करना पड़ता है क्योंकि यह एक इन्टरनेट आधारित वर्चुअल कंप्यूटिंग प्रणाली है।
  • यह कंप्यूटिंग तकनीक Device Independent होते है अर्थात इस तकनीक में किसी भी Device से कोई भी प्रोग्राम अथवा फाइल को एक्सेस किया जा सकता है।
  • इस तकनीक में यूजर को कार्यस्थल पर बड़ी-बड़ी मशीन अथवा कंप्यूटर ले जाने की जरुरत नहीं होती है इसमें केवल एक सामान्य कंप्यूटर तथा उससे जुड़े एक्सेसरीज की ही जरुरत होती है, क्योंकि इसमें बड़ी-बड़ी मशीन कहीं और चल रहा होता है यूजर को केवल उसे इन्टरनेट के माध्यम से एक्सेस करना होता है।
  • इसमें यूजर की डाटा पूर्ण रूप से सुरक्षित रहता है क्योंकि डाटा को सुरक्षित रखने की सारी जिम्मेदारी सर्विस प्रोवाइडर की होती है।
  • इस तकनकी में यूजर अपनी डाटा अथवा प्रोग्राम को पूरी दुनियां में कहीं से भी जहाँ इन्टरनेट उपलब्ध हो एक्सेस कर सकता है तथा उसपर वर्क भी कर सकता है।
  • इसमें डिवाइस के स्लो होने अथवा सॉफ्टवेयर के क्रेश होने के झंझट से मुक्ति मिल जाती है क्योंकि इसमें जिस भी सॉफ्टवेयर तथा हार्डवेयर का हम उपयोग कर रहे होते है वह हमें सर्विस प्रोवाइडर के द्वारा क्लाउड बेसिस पर अलोट किया गया होता है, इसलिए इसकी सारी जिम्मेदारी सर्विस प्रोवाइडर की होती है।
  • इस कंप्यूटिंग तकनीक में उपयोगकर्ता अपनी जरुरत तथा बजट के आधार पर सारी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर रिसोर्सेस तथा कार्य समय सीमा का चयन कर सकता है। साथ ही कभी भी जरुरत पड़ने पर अपनी रिसोर्सेज को कम या ज्यादा कर सकता है।
  • इस कंप्यूटिंग तकनीक में उपयोगकर्ता के द्वारा जितनी रिसोर्सेज का उपयोग किया गया होता है उतनी ही किराया देना पड़ता है जिससे अतिरिक्त लागत बच जाता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग के उदहारण? Example of cloud computing?

  • Google Drive
  • Gmail
  • Dropbox
  • Adobe Creative Services
  • Microsoft Office 365
  • Wordpress Etc.
इन्हें भी देखें:→
👉Cloud Storage क्या है, जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.....
👉Cyber Security क्या है जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.....
👉Juice Jacking क्या है, जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.....
👉बैंकिंग फ्रॉड से कैसे बचें, जानने के लिए यहाँ क्लिक करें....

Conclusion (निष्कर्ष):हम आशा करते है की इस आर्टिकल को पढने के बाद आपको क्लाउड कंप्यूटिंग के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा, फिर भी यदि किसी प्रकार की समस्या रह गई हो तो बेझिझक कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। यह आर्टिकल आपको कैसी लगी इसकी प्रतिक्रिया कमेंट के माध्यम से जरुर दें, साथ ही अगर यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो अपने फ्रेंड सर्किल में अधिक से अधिक शेयर करें।
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