ROM क्या है | ROM कितने प्रकार के होते है?

रोम क्या है? ROM- Read Only Memory in hindi?
Read Only Memory

फ्रेंड्स हमलोग अपने रोजमर्रा के कार्यों  के लिए बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस का इस्तेमाल करते है जैसे- Mobile, Computer, TV, DTH, Washing Machine, Refrigerator इत्यादि, और ये डिवाइस इतने यूजर फ्रेंडली होते है की हम इसका इस्तेमाल बड़े ही आसानी से कर पते है क्योंकि इन सभी डिवाइस में हमारे लिए बहुत सारे Function तथा Auto Control दिए गए होते है। और शायद हम में से ज्यादातर लोगों को पता होगा की इन सभी डिवाइस में जो भी Function तथा Auto Control दिए गए होते है वो Software की देन है। पर Software तो कई प्रकार के होते है जिसमे से एक वो है जो केवल खास उसी डिवाइस के Hardware को Control करने के लिए बनाये जाते है जिसे Firmware कहा जाता है और आपको पता होना चाहिए कि ये Firmware जिस Chip में डाले जाते है उसे ROM Chip कहा जाता है जो उसी डिवाइस के Circuit Board पर किसी एक लोकेशन पर लगे होते है।
आज हमलोग इस टॉपिक में ROM के बारे में ही चर्चा करने जा रहे है, विशेष रूप से Computer ROM के बारे में। तो चलिए शुरू करते है......

ROM क्या है | What is ROM in hindi?

ROM जिसका पूरा नाम Read Only Memory है, यह कंप्यूटर की एक प्राइमरी मेमोरी होती है जिसको कंप्यूटर सबसे पहले रीड करता है क्योंकि इसमें Manufacturer Company के द्वारा कुछ Basic Functionality के Instructions तथा System के बारे में जरूरी Information प्रोग्राम के रूप में Store किये गए होते है।
यह एक Non Volatile मेमोरी होती है जिसमे डाटा हमेशा के लिए सुरक्षित रहता है। इसमें डाले गए प्रोग्राम को एक सामान्य यूजर डायरेक्टली छेड़-छाड़ नहीं कर सकता है बल्कि इसकी कण्ट्रोल एक Setting के रूप में यूजर को दिया गया होता है जिसको BIOS Setting कहा जाता है जहाँ से यूजर अपनी जरुरत के अनुसार इसकी डिफ़ॉल्ट सेटिंग में बदलाव कर सकता है। कंप्यूटर के ROM Chip को BIOS Chip भी कहा जाता है।

ROM के प्रकार | Types Of Read Only Memory In Hindi :-

जिस प्रकार इसके नाम से पता चलता है कि Read Only Memory अर्थात इसकी डाटा को केवल पढ़ा जा सकता है और वास्तविक में Primary Stage में इस Chip के अन्दर केवल डाटा एक ही बार Write किया जा सकता था साथ ही उस दोरान इसकी Storage Size भी बहुत ही कम थी। परन्तु समय तथा जरुरत के साथ जिस प्रकार ROM में तकनिकी बदलाव होता गया उसी प्रकार ये काफी Advance भी होता गया। जिस कारण इसके कई प्रकार हो गए जैसे-

MROM- इसका पूरा नाम Masked Read Only Memory है यह सबसे पहला ROM है। इसकी साइज बहुत कम होती है और इसपर एक ही बार Program डाला जा सकता है और इसे Rewrite या Update करना संभव नहीं है। आजकल के डिवाइस में इसका उपयोग नहीं किया जाता है।

PROM- इसका पूरा नाम Programmable Read Only Memory है इस ROM के Program को केवल एक बार Update या Reprogram कर सकते है दोबारा इसे प्रोग्राम करना संभव नहीं है।

EPROM- इसका पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory है। जैसा की नाम से ही पता चलता है कि इसे Erase तथा Program दोनों कर सकते है यानि इसकी पुरानी प्रोग्राम को मिटा कर नई प्रोग्राम डाला जा सकता है । इसकी डाटा को Erase करने के लिए UV Rays(Ultraviolet Rays) की आवश्यकता होती है। करीब 40 मिनट तक Rays से पास इस Chip को रखने पर इसकी डाटा Erase हो जाती है जिसमे फिर से Instruction Or Program डाल सकते हैं।

EEPROM- इसका पूरा नाम Electrically Erasable Programmable Read Only Memory है। जैसे जैसे टेक्नोलॉजी बदलता गया वैसे वैसे ROM भी Update होता गया ऐसे में EEPROM एक ऐसा ROM Chip है जिसपर जितनी बार चाहें उतनी बार उसपर Program Read & Write किया जा सकता है। इस रॉम पर डाटा Read Write करते समय पावर की जरुरत पड़ती है इसलिए इसे Electrically Erasable Programmable Read Only Memory कहते है। आजकल के Electronic Device में ज्यादातर यही ROM पाया जाता है।

Flash ROM - यह भी एक नई टेक्नोलॉजी का रॉम है जिसकी Read Write स्पीड बहुत ज्यादा होती है। इसके Program को भी Erase, Reprogram या Update कर सकते है। आज कल के Laptop, Desktop या महंगे उपकरण में Flash ROM का उपयोग किया जाता है।


फ्रेंड्स हमें उम्मीद है की इस टॉपिक को पढने के बाद आपको ROM के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा, फिर भी आपके मन में कोई प्रश्न हो तो कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। साथ ही यह आर्टिकल आपको कैसी लगी इसकी प्रतिक्रिया कमेंट में जरुर दें। अगर यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो औरों तक पहुँचाने के लिए Social Media के माध्यम से Share करें। धन्यवाद !