Fiber Optic Cable क्या है | fiber optic cable in hindi?

फाइबर ऑप्टिक केबल क्या होता है? Fiber Optic Cable In Hindi:-
fiber optic cable in hindi

आज के समय में हम में सभी लोग हमेशा इन्टरनेट से जुड़े रहते है और जब भी कोई डाटा या इनफार्मेशन किसी को भेजनी होती है तो चन्द मिनटों में दुनिया में कही बैठे लोगों को भेज देते है या जब कभी हमें किसी विषय के बारे में जानकारी चाहिए होती है तो हम Google, Youtube जैसे प्लेटफार्म पर उस टॉपिक को सर्च करते है और कुछ ही सेकंडों में परिणाम हमारे सामने होता है पर क्या आपने कभी सोचा है कि इन्टरनेट के माध्यम से इतनी जल्दी डाटा ट्रांसफर कैसे हो पाता है, पूरी दुनिया में इस नेटवर्क का जाल कैसे बनाया गया है, क्या ये डाटा दूर दूर तक बिना वायर के ही ट्रांसफर हो जाते है। अगर ऐसे ही सवाल आपके भी मन में आता है तो आज हमलोग इसका जबाब लाये है।

हम सब लोगों को पता है कि Communication System में सबसे बड़ी भूमिका Internet की है जो पूरी दुनिया में एक जाल की तरह फैली हुई है जिसके माध्यम से हमलोग आज एक दूसरे से हमेशा संपर्क में रहते है और किसी भी प्रकार की डाटा को एक दूसरे के साथ शेयर कर पाते है।

अब डाटा ट्रांसफर तो वायर के माध्यम से या वायरलेस तकनीक के माध्यम से भी हो जा रहा है परंतु जब इस डाटा को लंबी दूरी तक भेजना हो तो ये दोनों माध्यम धीमा पड़ जाते है और जब समंदर पार करके एक देश से दूसरे देश के बीच नेटवर्क बनाने की बात आती है तो वहां तो और भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है एक तो बहुत ही ज्यादा पानी और दूसरी लंबी दुरी।

इन्ही सारी समस्याओं को देखते हुए एक ऐसे Cable का विकास किया गया जो प्रकाश की गति से डाटा लंबी दूरी तक भी भेजने में सक्षम है जिसे Fiber Optic Cable कहा जाता है। इस केबल के माध्यम से डाटा इलेक्ट्रिसिटी के रूप में नहीं बल्कि प्रकाश के रूप एक जगह से दूसरी जगह जाता है।

इसे कई अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है जैसे- Optical Fiber Cable, Fiber Optic Wire, Fiber Wire.


Fiber Optic Cable की आन्तरिक संरचना:-
fiber optic cable internal view

इसकी संरचना की बात करें तो यह बहुत ही पतली वायर होती है सामान्य तौर पर एक बाल से थोड़ी ज्यादा इसकी मोटाई होती है जिसके बीचों-बीच एक बहुत ही बारीक़ Hole होती है जो Internally High Reflective होती है। यह High Quality Silica Glass मटेरियल से बने होते है। इस वायर के अन्दर Internal Reflection अच्छी रहे इसके लिए इसे 3 Layers में बनाया जाता है जिनमे से सबसे बीच वाली लेयर जिसमे Hole होती है उसे Core कहा जाता है जिसके अन्दर डाटा प्रकाश के रूप में मूवमेंट करती है। इसके बाद इसके ऊपर एक Layer और होती है जिसे Cladding कहा जाता है, फिर इसके ऊपर एक लेयर Silicon की Coating की जाती है। उसके बाद इसे मजबूती देने के लिए 3-4 Layer और चढ़ा दी जाती है। तब एक Fiber Optic Cable बनता है। वैसे इसे मजबूती देने के लिए कितनी लेयर प्रोटेक्शन होगी यह निर्भर करता है कि इसे कैसे और किस सरफेस में यूज़ किया जाना है जैसे- पानी के अन्दर, भूमि के अन्दर या पोल में लटकाना है।

सबसे ज्यादा मजबूती तथा सुरक्षा उस Fiber Optic Cable में दिया जाता है जिसको समंदर के अंदर बिछाया जाता है क्योंकि ये पानी के अन्दर ही रहता है साथ ही समंदर की बड़ी-बड़ी मछलियाँ भी इस केबल को छति पहुचने का काम करता है।

समंदर के अन्दर यूज़ किये जानेवाले ऑप्टिकल फाइबर केबल को Submarine Cable भी कहा जाता है जिसकी आन्तरिक संरचना इस प्रकार है-
submarine cable

समंदर में Fiber Optic Cable कैसे बिछाया जाता है:-
optical fiber cable installation in sea

Fiber Optic Cable का वृहत पैमाने पर उपयोग समंदर के अन्दर ही किया जाता है और विश्व के सभी देशों को एक नेटवर्क में जोड़ने में सबसे बड़ी बाधा समंदर ही है परन्तु इस बाधा के रहते हुए भी Fiber Optical Cable को समंदर के अन्दर ही बिछाकर इसका हल निकाल लिया गया है। वर्तमान समय में तो समंदर के अन्दर इसकी जाल बिछी हुई है क्योंकि सभी एक दुसरे देशों को समंदर के रास्ते ही फाइबर ऑप्टिक केबल के माध्यम से नेटवर्क में जोड़ा गया है।

अब समंदर के अन्दर भी केबल को बिछाना आसान तो है नहीं क्योंकि इसमें पानी भी बहुत ही गहराई तह होती है और इसके सरफेस में भी ऊँची-खाई रहती है। ऐसे में इसके अन्दर केबल बिछाने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों का सहारा लिया जाता है जिसमे एक मशीन Ship Type में होते है जिसमे Fiber Optic Cable की बड़ी सी Bundle लगी होती है जो पानी के ऊपर चलती है और एक मशीन को केबल लेकर पानी के अन्दर सरफेस पर भेजा जाता है जो केबल बिछाने का कार्य करता है और ऊपर से इस मशीन को कंट्रोल किया जा रहा होता है। इसी प्रकार दोनों मशीन केबल बिछाते हुए आगे बड़ते जाता है और समंदर के एक ओर से दूसरी ओर तक चले जाता है।

समंदर की दुरी भी बहुत ही ज्यादा होती है जिस वजह से इस केबल के माध्यम दे जानेवाली Signal Weak न पड़े इसके लिए जगह-जगह Signal को Amplify करने के लिए Repeater लगा दिए जाते है। जिसको पानी के ऊपर ही लगाकर पूरी तरह सील करके पानी के अन्दर जी भेज दिया जाता है।

जब केबल बिछाई गई है तो कभी-कभी समस्या उत्पन्न होना लाजमी है, ऐसे सिचुएशन में बिना देरी किये इसकी रिपेयरिंग की जाती है। जिसके लिए हमेशा मशीन तथा इंजिनियर निगरानी में लगे रहते है। परन्तु जब केबल में समस्या ज्यादा उत्पन्न हो जाती है तो सीधा इसको बदल दिया जाता है।


Fiber Optic Cable के अंदर डाटा ट्रांसफर कैसे होता है?
optical fiber communication system

इसमें डाटा Electric Form में नहीं बल्कि Light के Form में ट्रेवल करती है। जो Total Internal Reflaction के सिद्धान्त पर कार्य करता है। अर्थात इसके एक सिरे पर Light डाला जाय तो Internally Reflacted होते हुए वह Light अंतिम सिरे तक पहुच जायेगा।

अब इसके अंदर वास्तविक में डाटा ट्रांसफर कैसे होता है इसको समझने से पहले Conductor Lane के माध्यम से डेटा ट्रांसफर कैसे होता है इसको समझते है। जब किसी भी इलेक्ट्रॉनिक्स मशीन से Data Conductor Lane के माध्यम से Output होता है तो वह Binary System (0011101011) में होता है अर्थात वह Electric Form में High-Low-High-Low Pulse के रूप में Flow होता है।

अगर यदि इसी डाटा को प्रकाश के रूप में Fiber Optic Cable के माध्यम से ट्रांसफर करवाना हो तो सबसे पहले इसे Electric Form से Light Form में Conversion कराने कि जरुरत होगी जिसके लिए Optical Fiber Transmitter System में Cable के Starting Point पर Transmitter लगे होते है जो इलेक्ट्रिक के रूप में आ रही सिग्नल को प्रकाश के रूप में बदलकर फाइबर ऑप्टिक केबल को देने का काम करता है। अब Light के form में जो भी डाटा जा रही है उसको डायरेक्ट सभी इलेक्ट्रॉनिक्स मशीन नहीं समझ सकता क्योंकि किसी भी इ-मशीन को समझने के लिए वह डाटा Electric Form में चाहिए जिसके लिए फिर से Cable के अंत में Light Signal को Electric Signal में बदलने के लिए एक Converter चाहिए जिसके लिए Receiving System में एक Receiver लगे होते है जो प्रकाश के रूप में आ रही डाटा को इलेक्ट्रिक सिग्नल के रूप में बदलकर आगे की सर्किट को दे देता है।

अगर यदि इसके द्वारा ट्रान्सफर किये जानेवाले सिग्नल को दो रूट में भेजना हो तो इसके लिए एक डिवाइस को लगाना पड़ता है जिसे Beam Splitter कहा जाता है।

जब इस Cable के माध्यम से लंबी दूरी तक डाटा ट्रांसफर की जाती है तो एक निश्चित दुरी के बाद इसके भी Signal Weak होने लगते है जिससे Speed कम हो जाती है इससे बचने के लिए Weak Signal को फिर से Boost किया जाता है जिसके लिए Amplifier लगाये जाते है जिसे Repeater भी कहा जाता है।

 

Fiber Optic Cable कितने प्रकार के होते है:-

Signal Transmission के आधार पर यह केबल मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है-

Single Mode Fiber (SMF)-
Single mode opticle fiber cable

सिंगल मोड फाइबर केबल के माध्यम से एक साथ केवल एक ही सिग्नल ट्रान्सफर किया जा सकता है क्योंकि इसके Core का Diameter बहुत ही कम होता है लगभग 8 से 10 Micro Meter, चुकी Diameter कम रहती है इसलिए इसके द्वारा बीचों-बीच सिग्नल ट्रान्सफर किया जाता है जिस कारण इसमें सिग्नल Losses कम होती है इसलिए SMF Cable का उपयोग ज्यादातर लम्बी दुरी तक सिग्नल ट्रान्सफर करने के लिए किया जाता है।

Multi Mode Fiber (MMF)-
Multimode optical fiber cable

मल्टी मोड फाइबर केबल की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसके द्वारा एक से ज्यादा सिग्नल को एक साथ ट्रान्सफर किया जा सकता है। इसके Core की Diameter लगभग 50 से 100 Micro Meter तक होती है। इस केबल के माध्यम से ट्रान्सफर की जानेवाली सिग्नल को अलग-अलग एंगल में भेजा जाता है। चूँकि सभी सिग्नल एंगल में चलती है इसलिए इसमें डाटा ट्रान्सफर स्पीड एक लिमिटेड दुरी के बाद थोड़ी स्लो हो जाती है इसलिए MMF Cable का उपयोग ज्यादातर कम दुरी वाले Communication System में किया जाता है।

Fiber Optic Cable की विशेषताएं तथा नुकसान:-

विशेषताएं-

  • इस केबल के माध्यम से High Speed में डाटा ट्रांसमिशन होता है।
  • इसके द्वारा लम्बी दुरी तक सिग्नल भेजा जा सकता है।
  • इसके द्वारा ट्रान्सफर हो रहे सिग्नल को Electro Magnetic Field का कोई हस्तक्षेप नहीं हो पता है।
  • इसके माध्यम से इलेक्ट्रिक सिग्नल नहीं बल्कि लाइट सिग्नल ट्रान्सफर होता है इसलिए इसमें विधुत अघात नहीं लगता है।

नुकसान-

  • इस केबल के नुकसान की की बात करें तो इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है की यह बहुत ही महँगी होती है इसलिए इसके माध्यम से डाटा ट्रान्सफर लागत बहुत ही ज्यादा हो जाती है।
  • इसकी सेटअप भी सभी लोग नहीं कर सकते है इसके लिए एक्सपर्ट की जरुरत होती है।
  • इसकी रिपेयरिंग भी महँगी होती है।
  • इस केबल में एक जॉइंट करने के लिए भी मशीन की मदद लेनी पड़ती है।

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