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कंप्यूटर वायरस क्या है? Computer virus kya hai? यहाँ जानें?

कंप्यूटर वायरस क्या है? What is computer virus in hindi?

फ्रेंड्स हम में से जो भी लोग कंप्यूटर का इस्तेमाल करते है वे कभी न कभी कंप्यूटर के स्लो होने जैसी समस्याओं का सामना तो करा ही होगा, और जब इन समस्याओं के बारे में अपने मित्रों या तकनीशियन को बोला होगा तो वे आपको अन्य कारणों के बारे में बताने के साथ-साथ एक और कारणों के बारे में बताया होगा वो कारण है कंप्यूटर का वायरस इन्फेक्टेड होना और ऐसा होता भी है। परंतु जब पहली बार आपको कंप्यूटर में वायरस होने जैसी कारणों के बारे बताया गया होगा या सुन रहे होंगे तो शायद आप कंफ्यूज हो गए होने की ये वायरस कंप्यूटर में कैसे हो सकता है ये कोई नेचुरल चीज थोड़ी है पर ऐसी बात नहीं है कंप्यूटर को भी इन्फेक्ट करने के लिए वायरस होती है जो यदि आपके कंप्यूटर को संक्रमित कर दे तो कुछ ही दिनों में वे अजीब से इंटरेक्शन करने लगते है और पागल की तरह आपके सामने करने लगते है। पर क्या आप जानते है कि कंप्यूटर वायरस क्या होता है? कंप्यूटर वायरस कितने प्रकार के होते है? हमारे कंप्यूटर सिस्टम वायरस कहाँ से आते है? कंप्यूटर में वायरस आ जाने से क्या समस्याएं उत्पन्न होती है? अपने कंप्यूटर को वायरस से कैसे बचाएं? यदि कंप्यूटर पूरी तरह वायरस से संक्रमित हो जाये तो क्या करें? अगर हां तो बहुत अच्छी बात है नहीं तो अभी आप जानने वाले है क्योंकि आज हमलोग इस आर्टिकल में कंप्यूटर वायरस के बारे में ही चर्चा करने जा रहें है इसलिए आपसे आग्रह है कि पूरी आर्टिकल को ध्यानपूर्वक पढ़ें…..

कंप्यूटर वायरस क्या है? Computer virus kya hai?
Computer virus kya hai?

कंप्यूटर Virus जिसका फुल फॉर्म होता है Vital Information Resources Under Siege, यह कोई खास चीज या कोई नेचुरल चीज नहीं होती है बल्कि यह भी एक कंप्यूटर प्रोग्राम या कहें तो सॉफ्टवेयर ही होता है जो बनाये ही गए होते है कंप्यूटर को खराब करने के लिए। कंप्यूटर वायरस एक प्रकार का Malware यानि Malicious Software होता है जो यूजर के हित मे काम ना करके अहित में काम करते है। इसको डेवेलप भी कोई प्रोग्रामर ही करता है परंतु उद्देश्य गलत होता है इसलिए ऐसे प्रोग्रामर को साइबर क्रिमिनल कहना भी गलत नहीं होगा क्योंकि इनकी मानसिकता लोगों के साथ गलत करना होता है।

हालांकि आज इंटरनेट पर बहुत सारे छोटे-छोटे कंप्यूटर वायरस प्रोग्राम या वायरस संक्रमित सॉफ्टवेयर बिखरे पड़े है जिसको यदि गलती से अपने कंप्यूटर में इनस्टॉल कर लिया जाए तो वे पूरी कंप्यूटर मशीन को संक्रमित कर देते है।

कुछ कंप्यूटर वायरस हैकिंग के उद्देश्य से बनाये गए होते है जिसको किसी के कंप्यूटर या नेटवर्क में भेजने के लिए भी हैकर के द्वारा तरह-तरह के हतकंडे अपनाए जाते है परंतु कुछ कंप्यूटर वायरस वैसे ही इंटरनेट पर बिखरे पड़े है जिसका कोई विशेष उद्देश्य तो नहीं होता है पर वे भी यदि आपके कंप्यूटर में किसी माध्यम से पहुंच जाते है तो आपके कंप्यूटर को संक्रमित कर देते है जिससे कंप्यूटर में तरह-तरह के परेशानी देखने को मिलते है।

कभी-कभी किसी सॉफ्टवेयर में कोई त्रुटि उत्पन्न हो जाने पर भी वे वायरस के तरह बर्ताव करने लगते है पर वे वास्तव में कंप्यूटर वायरस नहीं होते है फिर भी हमे ऐसा लगता है कि हमारे कंप्यूटर में वायरस आ गया है। हालांकि हर एक केस में डरने वाली कोई बात नहीं होती है क्योंकि हर कंप्यूटर वायरस उतनी मजबूत नहीं होती है कि वे आपके कंप्यूटर को आसानी से संक्रमित कर दे क्योंकि हमारे कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम में भी एंटीवायरस प्रोग्राम प्री इन्सटाल्ड होते है साधारण कंप्यूटर वायरस को आसानी से डिटेक्ट करके उसे डिस्ट्रॉय कर देते है, परंतु कुछ कंप्यूटर वायरस वैसे होते है जिसे पकड़ना साधारण एंटीवायरस सॉफ्टवेयर के भी बस की बात नहीं होती है। इसलिए इससे बचने के लिए हमेशा अपने कंप्यूटर में ओरिजिनल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहिए, उसे अपडेटेड रखना चाहिए और हमेशा एक अच्छे एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि कंप्यूटर वायरस से बचा जा सके।

कंप्यूटर वायरस का इतिहास?

कंप्यूटर वायरस के इतिहास की बात करें तो इसका इतिहास लगभग 50 वर्ष पुराना है, कंप्यूटर वायरस के इतिहास में सबसे पहले 1971 में Robert Thomas नाम के एक इंजीनियर ने पहला एक कंप्यूटर वायरस डेवेलप किया था जिसका नाम रखा गया था "Creeper Virus", और ये एक Experimental उद्देश्य से बनाया गया Malicious Program था जिसे की Robert Thomas ने ARPANET के Computer को Infect करने के लिए बनाया था। ये Malicious Programs सिस्टम को इन्फेक्ट करने के बाद निम्नलिखित मैसेज स्क्रीन पर Display करता था:- “I’m the creeper: Catch me if you can.”

Malicious Programs को “Computer Virus” का नाम देने वाला सबसे पहला व्यक्ति था "Fred Cohen", जिन्होंने सन 1983 में ये नाम रखा था।

उसके बाद सन 1986 में पाकिस्तान के दो भाइयों द्वारा MS-DOS आधारित कंप्यूटर के लिए पहला कंप्यूटर वायरस बनाया गया जिसका नाम "Brain" था। यह फ्लॉपी डिस्क पर बूट सेक्टर को Overwrite कर देता था और कंप्यूटर को बूट होने से रोकने में सक्षम था। यह मूल रूप से दोनों पाकिस्तानी भाइयों ने अपने द्वारा बनायीं सॉफ्टवेयर की कॉपी वितरण को रोकने के लिए डिजाइन किया गया था परन्तु बाद में जाने-अनजाने में एक वायरस का रूप ले लिया।

इसके बाद इसी तरह कई सारे Malicious Software का विकास किया होता गया, कोई प्रैंक के लिए बनाया और बाद में वायरस का रूप ले लिया, तो कोई सॉफ्टवेयर पायरेसी से बचने के लिए बनाया और बाद में वायरस का रूप ले लिया, तो किसी ने जान-बुझकर किसी उदेश्य से बनाया, इसी तरह से सिलसिला चलता गया और दुनिया में कंप्यूटर वायरस का प्रचार हो गया जो आगे चलकर एक बड़ी मुसीबत बन गयी है। आज की बात करें तो आज सॉफ्टवेयर की दुनिया काफी विकसित हो चुकी है और प्रोग्रामिंग काफी एडवांस हो चूका है इसलिए आज पहले से भी पावरफुल वायरस बनाया जा सकता है, जिसका नाजायज फायदा आज साइबर क्रिमिनल भी उठा रहे है। हालांकि इससे बचने के भी उपाय है जिसके बारे में हमलोग आगे जानेंगे।

कंप्यूटर वायरस कितने प्रकार के होते है?

कंप्यूटर वायरस कई प्रकार के होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख प्रकार के वायरस के बारे में हमलोग जानने जा रहे है जो निम्नलिखित है:-

रेसिडेंट वायरस (Resident Virus):

यह एक ऐसा कंप्यूटर वायरस होता है जो अपने आप को कंप्यूटर की मेमोरी में छुपा कर स्टोर कर लेता है और वायरस की प्रोग्रामिंग के आधार पर यह कंप्यूटर द्वारा चलाई जा रही किसी भी फाइल को संक्रमित कर सकता है। यह वायरस मेमोरी में संग्रहीत होने के कारण इसको कंप्यूटर के अन्य भागों तक पहुंचना और अलग-अलग भागों को संक्रमित करना आसान होता है। इसके संक्रमण से कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम लोड होने में, ओपरेट करने में, कोई सॉफ्टवेयर ओपन करने में, सिस्टम शट-डाउन करने में, डाटा को कॉपी-पेस्ट करने, इत्यादि में बाधा उत्पन्न होती है।

डायरेक्ट एक्शन वायरस (Direct Action Virus):

यह एक वैसा कंप्यूटर वायरस होता है जो खुद को किसी Executable File (.exe, .com) यानि प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर के साथ अटैच कर लेते है और जब उस Executable Program को किसी कंप्यूटर में Execute किया जाता है तो उस कंप्यूटर में स्प्रेड होकर संक्रमित करते है। यह कंप्यूटर की मेमोरी में भी स्थापित हो जाते है और यदि यह मेमोरी में स्थापित हो जाता है तो यह अपने आप को छुपा कर रखता है, इसे Non-Resident Virus के रूप में भी जाना जाता है।

फाइल इंफेक्टर वायरस (File Infectors Virus):

फ़ाइल इन्फेक्टर वायरस एक ऐसा वायरस है जो Executable File (.exe, .com) को स्थायी रूप से क्षति पहुंचाने या उन्हें अनुपयोगी बनाने के इरादे से बनाया गया होता है, फ़ाइल इन्फेक्टर वायरस किसी Executable File के ओरिजिनल कोड को Overwrite करके संक्रमित कोड सम्मिलित करके उसे आंशिक रूप से या पूरी तरह ख़राब कर देता है। फाइल इंफेक्टर वायरस पूरी कंप्यूटर या नेटवर्क को संक्रमित करने के लिए पूरे सिस्टम और नेटवर्क पर भी फैल सकता है। फाइल इंफेक्टर वायरस को फ़ाइल इंजेक्टर के रूप में भी जाना जाता है।

डायरेक्टरी वायरस (Directory Virus):

डायरेक्टरी वायरस जिसे क्लस्टर वायरस भी कहा जाता है यह एक ऐसा वायरस होता है जो फाइलों के Path के डायरेक्टरी को ही चेंज कर देता है और Main Location से ले जाकर कही भी फाइल को छोड़ देता है। इस वायरस के द्वारा कंप्यूटर को संक्रमित किये जाने पर फ़ाइल जहां तहां चलें जाते है।

मैक्रो वायरस (Macro Virus):

मैक्रो वायरस पूरी कंप्यूटर को असर नहीं करता है बल्कि ये केवल वैसे Particular प्रोग्राम और एप्लीकेशन को प्रभवित करता है जिसमे Macro Function पाया जाता है। इस वायरस के द्वारा किसी सॉफ्टवेयर को संक्रमण किये जाने पर वह सॉफ्टवेयर सही से कम नहीं कर पाता है।

वेब स्क्रिप्टिंग वायरस (Web Scripting Virus):

वेब स्क्रिप्टिंग वायरस एक खतरनाक वायरस है जो आपके डिवाइस और वेब ब्राउज़र की सुरक्षा को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और एक बार जब यह आपके वेब ब्राउज़र की सुरक्षा को भंग कर देता है, तो यह इसमें छोटे या बड़े बदलाव कर सकता है, चाहे वायरस वेब पेजों या किसी अन्य माध्यमों से फैला हो, यह डेटा चुरा सकता है, फाइलों को नुकसान पहुंचा सकता है और सामान्य डिवाइस के उपयोग में बाधा डाल सकता है। वेब स्क्रिप्टिंग वायरस को ज्यादातर क्लिक करने योग्य मीडिया जैसे वीडियो, चित्र या लिंक के साथ अटैच करके इन्टरनेट के माध्यम से आपके कंप्यूटर तक पहुँचाने की कोशिश किया जाता है।

बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus):

ये वायरस हार्ड डिस्क के उस स्टोरेज सेक्टर को संक्रमित करता है जहां स्टार्टअप फाइलें Master Boot Record (MBR) पाई जाती हैं जिसे बूट सेक्टर कहा जाता है। एक बार कंप्यूटर के संक्रमित हो जाने पर बूट सेक्टर वायरस आमतौर पर संक्रमित सिस्टम पर एक्सेस की गई प्रत्येक डिस्क को संक्रमित करने का प्रयास करते हैं। अगर ये वायरस कंप्यूटर में आ जाते हैं तो कंप्यूटर को स्टार्ट होने में बहुत समय लगता है। क्योंकि ये वायरस ऑपरेटिंग सिस्टम पर अटैक करते हैं जिससे ऑपरेटिंग सिस्टम लोड होने में अधिक समय लेता है। बूट सेक्टर कंप्यूटर वायरस सबसे अधिक संक्रमित फिजिकल मीडिया का उपयोग करने से फैलता हैं।

ओवरराईट वायरस (Overwrite Virus):

इस प्रकार के वायरस कंप्यूटर में Save File को Overwrite कर देता है मतलब कि कंप्यूटर में Save File को डेटा को मिटाकर अपने कोड को डाल देता है जिससे कि फाइल को पहचानना मुश्किल होता है और फाइल किसी काम की नहीं रह जाती है। ओवरराइटिंग वायरस को एक दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम माना जाता है जिसका उद्देश्य कंप्यूटर सिस्टम को संक्रमित करना और प्रोग्राम को नष्ट करना है। जब ये वायरस कंप्यूटर में प्रवेश कर जाते हैं तो संक्रमित फाइल को डिलीट करना पड़ता है।

ब्राउज़र हाईजेकर (Browser Hijacker):

इस प्रकार के वायरस एक प्रकार से वेब ब्राउज़र को हाईजैक कर लेता हैं जो उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना वेब ब्राउज़र की सेटिंग्स को संशोधित कर देता है और उपयोगकर्ता को उन वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट करता है जिन पर उपयोगकर्ता का इरादा नहीं था। इसे अक्सर ब्राउज़र रीडायरेक्ट वायरस कहा जाता है क्योंकि यह ब्राउज़र को आमतौर पर दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट करता है। जब ये वायरस कंप्यूटर में प्रवेश कर जाता हैं तो यूजर के द्वारा टाइप किये गए यूआरएल वाली वेबसाइट पर लैंडिंग करने के बजाय किसी अन्य वेबसाइट पर लैंड होने लगते है। यह वायरस Website, Games, File इत्यादि के जरिये System मे प्रवेश करती है।

हालाँकि इसमें ध्यान देने वाली एक बात है की Website Redirection हमेशा वायरस के वजह से नहीं होते है बल्कि सामान्य अवस्था में भी यदि किसी वेबसाइट पर Redirection सेट हो तो वे जहाँ चाहें वहां आपको लैंड करा सकते है, इसलिए किसी-किसी वेबसाइट का यूआरएल टाइप करने पर यदि आप टारगेट पेज पर लैंडिंग होने के बजाय किसी अन्य वेबसाइट पर Redirect हो जा रहें है तो इसका मतलब ये नहीं होगा की आप Browser Hijacker Virus का शिकार हो चुकें है।

हमारे कंप्यूटर सिस्टम में वायरस कहाँ से आते है?

किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में वायरस स्वतः ही नहीं आते है बल्कि किसी मीडिया श्रोत के साथ आते है जो निम्नलिखित है:-
  • इंटरनेट पर से कोई पायरेटेड सॉफ्टवेयर डाउनलोड करके इनस्टॉल करने पर।
  • वायरस संक्रमित सॉफ्टवेयर, डिवाइस ड्राइवर को इनस्टॉल करने पर।
  • वायरस संक्रमित कोई प्रोग्राम या बैच फ़ाइल रन कराने पर।
  • वायरस संक्रमित कंप्यूटर के डेटा को प्राप्त करने पर।
  • वायरस संक्रमित Data Storage Media का उपयोग करने पर।
  • ईमेल के माध्यम से संक्रमित फ़ाइल को प्राप्त करने पर।
  • वायरस इन्फेक्टेड मोबाइल फ़ोन को अपने कंप्यूटर के साथ कनेक्ट करने पर।
  • इंटरनेट पर विज्ञापन की तरह दिखाई जानेवाली एडवेयर पॉपअप को अनुमति देने पर।

कंप्यूटर में वायरस आ जाने से क्या समस्याएं उत्पन्न होती है?

वैसे तो कंप्यूटर में वायरस आ जाने के कोई एक विशेष लक्षण नहीं है जिसके बारे में बता दिया जाय, फिर भी अलग-अलग प्रकार के वायरस हमारे कंप्यूटर को अलग-अलग तरह से इन्फेक्ट करते है जो कंप्यूटर में अलग-आग तरह की समस्या उत्पन्न करते है, जिनमे से कुछ समस्याओं के बारे में बताने का काम किया है जो निम्नलिखित है:-
  • जब भी कोई कंप्यूटर वायरस इन्फेक्टेड हो जाता है तो वह अचानक से स्लो चलने लगता है।
  • यूजर के साथ अजीब से इंटरेक्शन करने लगते है।
  • अपने आप कोई प्रोग्राम ओपन हो जाते है बंद हो जाते है।
  • माउस पॉइंटर स्टेबल नहीं रह पाते है।
  • किसी प्रोग्राम को ओपन करने में बहुत ज्यादा टाइम लेने लगता है।
  • अपने आप कंप्यूटर बंद हो जाता है या बार-बार रीस्टार्ट होने लगता है।
  • कंप्यूटर हैंग होने लगता है।
  • अपने आप बहुत से फ़ाइल फोल्डर क्रिएट हो जाते है।
  • बहुत सारे फ़ाइल के नाम बदल जाते है और अतिरिक्त एक्सटेंशन बन जाता है।
  • बहुत सारे फ़ाइल ओपन नहीं होने लगते है या वे खराब हो जाते है।
  • कई बार कंप्यूटर में मौजूद सभी फ़ाइल एन्क्रिप्ट हो जाते है।
  • कई बार ऑपरेटिंग सिस्टम या कोई एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर भी क्रैश हो जाता है।
यहां हमने जितनी भी लक्षण के बारे में बताया है इनमे से कुछ लक्षण ऐसे है जो जरूरी नहीं है कि वे केवल कंप्यूटर में वायरस आने पर ही दिखाई देते है बल्कि सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर में प्रॉब्लम आने पर भी ऐसी समस्या उत्पन्न होती है, हालांकि फ़ाइल खराब हो जाना, फ़ाइल एन्क्रिप्ट हो जाना, नाम बदल जाना, अपने आप बहुत सारी फ़ाइल फोल्डर क्रिएट होने वाले लक्षण ज्यादातर कंप्यूटर वायरस के आने पर ही दिखाई देते है। साथ ही हमारे द्वारा बताए गए लक्षण के अलावे भी कंप्यूटर वायरस के केस में कई और तरह के लक्षण दिखाई दे सकते है। इसके अलावे कई बार वायरस संक्रमण के केस में ऐसा भी हो सकता है कि आपके कंप्यूटर पर कोई प्रॉब्लम दिखाई ना दे और वे बैकग्राउंड में रन हो रहा हो जो कंप्यूटर पर मौजूद सारी डेटा और आपके द्वारा कंप्यूटर पर किये जा रहे इंटरेक्शन को किसी अन्य के साथ ऑनलाइन साझा कर रहा हो, हालांकि ऐसा तब होता है जब आपके सिस्टम पर कोई हैकर टारगेट कर रहा हो और संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिश कर रहा हो।

अपने कंप्यूटर को वायरस से कैसे बचाएं?

कंप्यूटर को वायरस इन्फेक्टेड होने से बचने के लिए जो सावधानी बरतनी चाहिए वो निम्नलिखित है, जैसे:-
  • अपने कंप्यूटर पर हमेशा एक अच्छे एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • कोई भी पायरेटेड ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर यूज़ करने से बचना चाहिए।
  • हमेशा किसी विश्वशनीय सोर्स या ऑफिसियल वेबसाइट के माध्यम से ही कोई सॉफ्टवेयर, डिवाइस ड्राइवर, फर्मवेयर को डाउनलोड करके इनस्टॉल करना चाहिए।
  • कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को हमेशा अपडेटेड रखना चाहिए।
  • फ्री वर्जन वाले सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए हमेशा उसकी ऑफिसियल वेबसाइट का ही यूज़ करना चाहिए।
  • इंटरनेट पर किसी वेबसाइट के द्वारा दिखाई जानेवाली एडवेयर पॉपअप जो कि विज्ञापन की तरह होते है उसको परमिशन देने से बचना चाहिए।
  • कोई वेबसाइट आपसे कोई परमिशन की सहमति मांगता है तो उसे अच्छी तरह रीड करके ही एग्री करना चाहिए, यदि वो आपके विरुद्ध हो तो परमिशन नहीं देना चाहिए।
  • किसी अनजान सोर्स से प्राप्त ईमेल के माध्यम से भेजी गयी अटैचमेंट फ़ाइल को ओपन करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
  • सोशल मीडिया के माध्यम से प्रोवाइड की जानेवाली सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करके इनस्टॉल करने से बचना चाहिए।
  • बाहर से कोई भी स्टोरेज डिवाइस लगाने से पूर्व यह जान लें कि वे वायरस फ्री हो।
  • यात्राओं के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को अपने लैपटॉप में मोबाइल कनेक्ट करने की अनुमति नहीं देना चाहिए।
  • इंटरनेट से कनेक्टेड रहने पर अचानक कोई पॉपअप दिखाई दे तो उसे अनुमति नहीं देना चाहिए।

यदि कंप्यूटर वायरस से संक्रमित हो जाये तो क्या करें?

यदि किसी कारणवश आपका कंप्यूटर वायरस संक्रमित हो जाता है तो सबसे पहले उसे एंटीवायरस से फुल स्कैन करके देखना चाहिए, अगर वो ठीक हो जाता है तो बहुत अच्छी बात नहीं तो आपको अपने कंप्यूटर को पिछली Restore Point से Restore अथवा Factory Reset करके देखना चाहिए, इसके वावजूद भी यदि आपका कंप्यूटर ठीक से काम नहीं कर रहा हो तो उसे पूरी तरह Format करके सॉफ्टवेयर का Re-Installation करवाना पड़ेगा।

इन्हें भी देखें:→

Conclusion:
फ्रेंड्स हमने इस आर्टिकल में कंप्यूटर वायरस के बारे में बिलकुल सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया है और हमें उम्मीद है की हमारे द्वारे कंप्यूटर वायरस के बारे में लिखी गयी इस आर्टिकल को पढने के बाद आप जान गए होंगे की कंप्यूटर वायरस क्या होता है, फिर भी किसी प्रकार की कोई कंफ्यूजन रह गयी हो तो कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। यह आर्टिकल आपको कैसी लगी इसकी फीडबैक जरुर दें क्योंकि आपकी फीडबैक ही आपके द्वारा पढ़े जा रहे आर्टिकल की गुणवत्ता तय करती है, साथ ही अगर यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो अपने फ्रेंड सर्किल में अधिक से अधिक शेयर करें। इसी तरह की कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी से सम्बंधित आर्टिकल पढ़ते रहने के लिए Comtechinhindi.IN से जुड़े रहें. धन्यवाद !

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