सॉफ्टवेयर क्या होता है? Software kya hota hai? पूरी जानकारी बिलकुल आसान शब्दों में?

सॉफ्टवेयर क्या होता है? What is software in hindi?

फ्रेंड्स हम सभी कंप्यूटर और बहुत सारे कंप्यूटराइज्ड डिवाइस जैसे- स्मार्टफोन, एटीएम मशीन, टिकट वेंडिंग मशीन, पेट्रोल वेंडिंग मशीन इत्यादि से भली-भांति परिचित हैं और हम सभी को यह भी पता है कि ये सभी एक स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जिनमें हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर दोनों का यूज़ किया गया होता है और इन दोनों के हेल्प से ही पूरी एक मशीन अपना प्रॉपर कम कर पाता है।

ऐसे में हार्डवेयर की बात करा तो शायद हम सभी को पता है की इसमें लगे सारे फिजिकल पार्ट जिसे हम देख तथा छू कर भी अनुभव कर सकते हैं वे सभी हार्डवेयर कहलाते हैं, परंतु जब सॉफ्टवेयर की बात आती है तो हम में से ज्यादातर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर ये सॉफ्टवेयर वास्तविक में है क्या? इसलिए आज हम लोग इस टॉपिक में सॉफ्टवेयर से संबंधित सभी प्रश्नों के बारे में विस्तृत चर्चा करने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते हैं....

सॉफ्टवेयर क्या है? Software kya hai?
Software kya hota hai?

सॉफ्टवेयर कोई एक फिजिकल पार्ट नहीं होता है बल्कि यह कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज मैं लिखा गया इंस्ट्रक्शन सेट तथा प्रोग्रामों का एक ऐसा समूह होता है जो किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को यूजर फ्रेंडली एवं स्वचालित मशीन बनाने मैं सहायता प्रदान करता है जिसे सॉफ्टवेयर कहा जाता है। सॉफ्टवेयर की मदद से ही मनुष्य अपनी बात कंप्यूटर या किसी अन्य कंप्यूटराइज्ड उपकरण को समझा पता है।

सॉफ्टवेयर को हम फिजिकली छू कर अनुभव नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह कोई फिजिकल पार्ट नहीं है बल्कि यह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में सॉफ्टवेयर डेवलपर के द्वारा टेक्स्ट के रूप में लिखा गया (Coding किया गया) बहुत सारे इंस्ट्रुक्शन्स (निर्देशों) का समूह होता है जिसे Source Code कहा जाता है, और इसी Source Code का कम्पलीट पैकेज जिसमे और भी प्रोग्रामों को जोड़कर एक Setup File बनाया जाता है वह सॉफ्टवेयर कहलाता है। Windows, Linux, Android, MS Office, Photoshop, Tally, Coral Draw, Mobile Apps इत्यादि ये सभी सॉफ्टवेयर के उदहारण है।


सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल केवल कंप्यूटरों में ही नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर आज के लगभग हर एक इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस या उपकरणों जैसे- TV, Mobile, Washing Machine, Petrol Vending Machine, ATM Machine इत्यादि में होता है, क्योंकि सॉफ्टवेयर के कारण ही हम सब किसी इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस या उपकरण को डिजिटल तरीके से कण्ट्रोल कर पाते है, बिना सॉफ्टवेयर के किसी भी इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण को डिजिटल तरीके से कण्ट्रोल नहीं किया जा सकता है। हालाँकि सभी इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस या उपकरण में उसके कार्यों के अनुसार अलग-अलग तरह के प्रोग्राम लिखे जाते है।

Programming Language:

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कंप्यूटर की एक भाषा होती है जिस भाषा में कोई भी प्रोग्राम लिखा जाता है क्योंकि कंप्यूटर या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक्स मशीन सीधे हमारी भाषा को नहीं समझ सकता इसके लिए एक विशेष भाषा को बनाया गया है जिसे प्रोग्रामिंग भाषा (Programming Language) कहा जाता है। प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को दो लेवल में बांटा गया है-

पहला: Low Level Language

दूसरा: High Level Language

वास्तव में Low Level Language ही होता जिसे कोई भी इलेक्ट्रोनिक मशीन डायरेक्टली समझ सकता है जिसे मशीनी भाषा कहा जाता है, यह मशीनी भाषा Binary Digit 0 और 1 के फॉर्म में होता है, इसमें 0 का मतलब होता है Low (Off) और 1 का मतलब होता है High (On).

लो लेवल लैंग्वेज में कंप्यूटर की प्रोग्राम को लिखना बहुत ही कठिन होता है इसलिए कंप्यूटर के क्षेत्र में जैसे-जैसे विकास होता गया वैसे-वैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में भी विकास हुआ और High Level Language को बनाया गया जिसमें प्रोग्राम लिखना आसान हो गया। हाई लेवल लैंग्वेज मैं कोई भी इंस्ट्रक्शन केवल बाइनरी डिजिट ना हो करके इसमें अंग्रेजी के अक्षर, नंबर तथा स्पेशल कैरक्टर उपयोग होता है जिस कारण इस भाषा में कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग करना आसान होता है। वैसे शुरुआती दौर में कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग लो लेवल लैंग्वेज में ही की जाती थी क्योंकि उस वक्त हाई लेवल लैंग्वेज का विकास नहीं हुआ था।
हाई लेवल लैंग्वेज के उदाहरण है- C, C++, Java, Python etc.

अब बता आती है कि हाई लेवल लैंग्वेज में अंग्रेजी के अक्षर, नंबर तथा स्पेशल कैरेक्टर की मदद से प्रोग्राम तो लिख लिया जाता है पर कंप्यूटर तो एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन जो Human Readable Language को तो नहीं समझ सकता बल्कि यह तो केवल इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को ही समझ सकता है जो इलेक्ट्रिसिटी के फॉर्म में होगा, इसके लिए High Level Language को एक ट्रांसलेटर प्रोग्राम की मदद से Machine Language में कन्वर्ट करके किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को समझने लायक बनाया जाता है और हम सभी जान रहे हैं कि मशीन लैंग्वेज 0 और 1 के फॉर्म मैं होता है जिसमें 0 का मतलब होता है Off और 1 का मतलब होता है On यानी या सिग्नल को On और Off करके कोई भी इंस्ट्रक्शन कंप्यूटर या किस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को समझाने का काम करता है। यह हाई लेवल लैंग्वेज से मशीनी लैंग्वेज में ट्रांसलेट करने का कार्य इंटरनली होता है और जो प्रोग्राम इसे ट्रांसलेट करने का कार्य करता है उसे Translator या Programming Language Translator कहा जाता है।

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में क्या अंतर है?

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में अंतर की बात करें तो इन दोनों में निम्नलिखित अंतर हो सकते है जैसे:-

हार्डवेयर कंप्यूटर के निर्माण में लगे वो सारे पार्ट्स को कहते है जिसे हम फिजिकली छु तथा देख सकते है, जबकि सॉफ्टवेयर को फिजिकली छु नहीं सकते है क्योंकि यह कोई फिजिकल पार्ट नहीं होता है बल्कि यह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखा गया इंस्ट्रक्शन का समूह होता है जिसका मुख्य काम होता है यूजर की बातों को कंप्यूटर को समझाना तथा उसपर निर्णय लेना।

कंप्यूटर के सभी हार्डवेयर पार्ट्स उसके निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि सॉफ्टवेयर उस निर्माण को उपयोगी कार्य सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

हार्डवेयर किसी कमांड पर एक्शन लेने का काम करता है, जबकि सॉफ्टवेयर हार्डवेयर को कमांड बताने का काम करता है तथा उस एक्शन के लिए उसे तेयार करने का काम करता है।

हार्डवेयर के बिना सॉफ्टवेयर बेकार है तो सॉफ्टवेयर के बिना हार्डवेयर भी बेकार है, इसलिए कह सकते है की ये दोनों एक दुसरे के पूरक है क्योंकि सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का सम्बन्ध मनुष्य के शारीर तथा आत्मा की तरह है, शारीर कंप्यूटर का हार्डवेयर है तो आत्मा उसका सॉफ्टवेयर।

सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते है? Software kitne prakar ke hote hai?

सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है:-
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)

सिस्टम सॉफ्टवेयर क्या है? System software kya hai?

सिस्टम सॉफ्टवेयर वे सॉफ्टवेयर होते हैं जिसे कंप्यूटर या किसी कंप्यूटर डिवाइस को कण्ट्रोल, मेंटेनेंस तथा मैनेजमेंट के लिए बनाए जाते हैं। यह किसी भी कंप्यूटराइज डिवाइस का सबसे मुख्य सॉफ्टवेयर होता है जिसका संबंध डायरेक्ट हार्डवेयर के साथ होता है जो डायरेक्ट हार्डवेयर के साथ कम्यूनिकेट करता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर ही सबसे पहला सॉफ्टवेयर होता है जो किसी कंप्यूटर कंप्यूटराइज्ड डिवाइस को जान देकर एक यूजर फ्रेंडली इंटरफ़ेस बनाने का काम करता है अर्थात सिस्टम सॉफ्टवेयर ही किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के हार्डवेयर को जान देकर उसे मनुष्य को समझने लायक तथा उस पर काम करने लायक बनाने का काम करता है।
Operating System (Windows, Linux, Android), Utility Software, Firmware इत्यादि सिस्टम सॉफ्टवेयर के उदहारण है.

👉System Software क्या है, विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें....

सिस्टम सॉफ्टवेयर भी कई तरह के होते हैं:
Operating System
Utility Software
Firmware
Device Driver
Compiler
Assembler
Linker
Loader etc.

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर क्या है? Application software kya hai?

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर वे सॉफ्टवेयर होते हैं जिसे यूजर के किसी खास कार्यों को पूरा करने के लिए ड़ेवेलप किए जाते हैं जैसे- फोटो एडिटिंग के लिए Photoshop, विडियो एडिटिंग के लिए Video Editor, डॉक्यूमेंट तेयार करने के लिए MS Word जैसे अलग-अलग तरह के कार्यों को करने के लिए अलग-अलग तरह के सॉफ्टवेयर बनाये जाते है जिसमे उस कार्य के अनुकूल फंक्शन तथा टूल दिए गए होते है। इसका संबंध डायरेक्ट हार्डवेयर के साथ ना हो करके इसका सम्बन्ध यूजर और सिस्टम सॉफ्टवेयर के साथ होता है।
एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण है: MS Office(Word, Excel, Power Point), Adobe Photoshop, Tally etc.

👉Application Software क्या है, विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें....

कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर की क्या भूमिका है?

कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर केवल एक बेजान इलेक्ट्रॉनिक मशीन बनकर रह जाएगा। कंप्यूटर के लिए सॉफ्टवेयर ही एक ऐसा चीज होता है जो उसे कार्य करने लायक बनाता है अर्थात उसमें जॉन डालने का काम करता है। अगर यदि कंप्यूटर में या किसी कंप्यूटराइज्ड डिवाइस में सॉफ्टवेयर ना हो तो वह मशीन केवल एक हार्डवेयर बनकर रह जाएगा और उस पर किसी भी तरह की गणितीय और तार्किक गणनाएँ नहीं की जा सकती।

इन्हें भी देखें:→

Conclusion (निष्कर्ष):
फ्रेंड्स हमें उम्मीद है की इस आर्टिकल को पढने के बाद आप अच्छी तरह समझ गए होंगे की सॉफ्टवेयर क्या होता है, फिर भी किसी प्रकार की कोई कंफ्यूजन रह गयी हो तो कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। यह आर्टिकल आपको कैसी लगी इसकी Feedback कमेंट के माध्यम से अवश्य दें क्योंकि आपके द्वारा दिए गए फीडबैक ही आपके द्वारा पढ़े जा आर्टिकल के गुणवत्ता में सुधार करता है। अगरी यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो अपने फ्रेंड सर्किल में अपने ज्ञान या इस आर्टिकल को शेयर करें। Comtech In Hindi से जुड़े रहने के लिए.... धन्यवाद !