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ब्लैक बॉक्स क्या होता है? Black Box kya hota hai? जानिए इसके कार्य?

ब्लैक बॉक्स क्या होता है, जाने ब्लैक बॉक्स के बारे में वो सारी बातें जो आप जानना चाहते है?

फ्रेंड्स हम सभी को पता है कि जब कभी भी कोई विमान (हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज या फाइटर जेट) किसी दुर्घटना का शिकार होता है तो शायद ही उसके अंदर बैठे कोई पायलट, क्रू-मेंबर या कोई व्यक्ति बच पता है, क्योंकि अक्सर जब भी कोई विमान क्रैश होता है तो उसमें आग लग जाती है जिससे उसमे बैठे इंसान के साथ-साथ पूरी विमान भी क्षतिग्रस्त हो जाती है, साथ ही वह इतने ऊपर से गिरते है कि उसमें बैठे इंसान या उस विमान का बच पाना लगभग नामुमकिन होता है।

ऐसे में जब कोई इंसान या वह विमान बचता ही नहीं है तो विमान के दुर्घटना होने के कारणों का पता लगाना भी बहुत ही मुश्किल काम हो जाता है, जबकि दुर्घटना के कारणों को जानना बहुत ही जरुरी होता है क्योंकि जब तक उस विमान में आयी हुई तकनिकी खामियां या दुर्घटना होने के अन्य कारणों को नहीं जाना जायेगा तब तक उस तरह की घटनाएं अन्य विमानों के साथ भी होने की संभावना बनी रहेगी या फिर हुई दुर्घटना एक रहस्य बनकर ही रह जायेगा।

इसलिए इसी समस्यओं से बचने के लिए और दुर्घटना होने के कारणों का पता लगाने के लिए हर एक विमान में एक उपकरण या कहें तो एक मशीन लगा होता है जिसे “Black Box” के नाम से जाना जाता है। पर क्या आपको पता है की आखिर यह Black Box होता क्या है, Black Box का क्या काम होता है, सब कुछ जल जाने के बाद भी ये Black Box क्यों नहीं जलता है। अगर ऐसे ही सवालों का जबाब ढूंढते हुए यहाँ तक आये है तो आप सही जगह है क्योंकि आज हमलोग इस टॉपिक में Black Box के बारे में ही चर्चा करने जा रहे है, इसलिए आपसे आग्रह है की पूरी आर्टिकल को ध्यानपूर्वक पढ़ें....

ब्लैक बॉक्स क्या होता है? Black Box kya hota hai?

Black Box kya hota hai?
ब्लैक बॉक्स विमान में लगा एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जो विमान के उड़ान के दौरान की सारी गतिविधियों को ऑटोमेटिकली रिकॉर्ड करता रहता है इसलिए इसे FDR- Flight Data Recorder भी कहा जाता है। यह विमान की दुर्घटना हो जाने के बाद इन्वेस्टीगेशन के दौरान दुर्घटना होने के कारणों का पता लगाने में मदद करता है।

ब्लैक बॉक्स बहुत ही मजबूत धातु टाइटेनियम का बना होता है ताकि ऊँचाई से जमीन पर गिरने, आग लगने या समुद्री पानी में गिरने की स्थिति में भी इसको कम से कम नुकसान हो, यही कारण है की प्लेन के सब कुछ क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद भी यह सुरक्षित रह पाता है। ब्लैक बॉक्स के अन्दर इलेक्ट्रॉनिक चिप इत्यादि लगी होती है जिसमे डाटा रिकॉर्ड होता है।

ब्लैक बॉक्स इतने मजबूत होते है की विमान के बिस्फोट हो जाने या आग लग जाने के बाद भी इसके ख़राब या खत्म होने की आशंका लगभग नहीं के बराबर होती है। क्योंकि यह लगभग 1 घंटे तक 1100 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान सह सकता है तथा यह 260 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान लगभग 10 घंटे तक सह सकता है साथ ही यह कई टनों का वजन अपने ऊपर सहन कर सकता है।

किसी भी विमान में ब्लैक बॉक्स कहाँ लगा होता है?

Black Box हर एक फ्लाइट के पिछले हिस्से में लगा होता है और इसको पीछे लगाने का भी एक कारण होता है। अक्सर जब कभी कोई फ्लाइट या विमान क्रैश होता है तो उसका पिछला हिस्सा बहुत ही कम क्षतिग्रस्त होता है इसलिए Black Box को पीछे लगाया जाता है, ताकि विमान के पूरी तरह नष्ट हो जाने के बाद भी Black Box कम से कम क्षतिग्रस्त हो। जिससे बाद में इन्वेस्टीगेशन टीम द्वारा इन्वेस्टीगेशन के दौरान उसे सही अवस्था में प्राप्त किया जा सके और जांचोपरांत उससे दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके।

ब्लैक बॉक्स का क्या काम होता है और यह कैसे काम करता है?

वास्तव में Black Box एक Data Recorder उपकरण होती है जो विमान के अंदर Cockpit में चल रही वार्तालाप और विमान की तकनिकी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने का काम करता है जो किसी भी प्रकार के दुर्घटना होने की स्तिथि में दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में मदद करता है।

Black Box में दो भाग होते है जिनमे से एक भाग होता है FDR (Flite Data Recorder) और दूसरा भाग होता है CDR (Cockpit Data Recorder)

FDR (Flite Data Recorder): FDR में विमान से सम्बंधित कुल मिलकर 80 से 90 प्रकार का आंकड़ा स्टोर होता है जैसे- विमान की दिशा, ऊँचाई, ईंधन, गति, झुकाव, बाहरी हवा का दबाब, केबिन का तापमान, तकनिकी त्रुटी इत्यादि। इसमें पिछले 24-25 घंटे का रिकॉर्ड हमेशा रहता है। इसके सारे आंकड़े को देखते हुए इससे यह पता लगाया जाता है की दुर्घटना के वक्त किस प्रकार की तकनिकी समस्या उत्पन्न हुई थी और उस वक्त विमान की क्या स्थिति थी।

CVR (Cockpit Voice Recorder):
CDR के अन्दर विमान के कॉकपिट में पायलट, को-पायलट और एयरबेस के एयर ट्रैफिक कण्ट्रोल स्टाफ के बीच चल रही वार्तालाप की रिकॉर्डिंग होती है इसलिए इसे Cockpit Voice Recorder कहा जाता है। इसके अन्दर पिछले 2 घंटे के वार्तालाप का रिकॉर्ड रहता है। इससे यह पता लगाया जाता है की दुर्घटना के वक्त किस प्रकार की माहोल बन रही थी और क्या परेशानी उत्पन्न हो रही थी।

ब्लैक बॉक्स बिना बिजली के भी 30 दिन तक काम करता रहता है। जब यह बॉक्स किसी जगह पर गिरता है तो यह लगातार 30 दिनों तक अपने अन्दर से एक विशेष तरह की आवाज तथा तरंग निकालता है जिससे फाइंडर मशीन की मदद से इन्वेस्टीगेशन टीम द्वारा कुछ दूर से ही आसानी से खोजा जा सकता है। यही कारण है की समंदर में भी गिर जाने की स्थिति में भी इसे आसानी से खोज लिया जाता है क्योंकि पानी में भी इसकी सेंसिंग सिस्टम काम करता रहता है।

ब्लैक बॉक्स किस रंग का होता है और इसे ब्लैक बॉक्स क्यों कहा जाता है?

ब्लैक बॉक्स का नाम भले ही “Black Box” अर्थात काला बक्सा हो पर वास्तव में इसका बाहरी रंग नारंगी कलर का होता है, इसे नारंगी रंग के रखने का कारण यह है की किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने की स्थिति में सब कुछ जल जाने पर भी दुर्घटनास्थल पर इन्वेस्टीगेशन के दौरान इसे आसानी से खोजा जा सके।

शुरुआत में इसका बाहरी रंग लाल होने के कारण इसे “Red Egg” के नाम से जाना जाता था और इसका नाम ब्लैक बॉक्स होने के पीछे कुछ लोगों का मानना है की शुरुआत में इस बॉक्स की भीतरी दीवार का रंग काला रखा जाता था जिस कारण इसका नाम ब्लैक बॉक्स पड़ा। साथ ही कुछ लोगों का मानना है की काला रंग दुर्घटना को दर्शाता है इसलिए इसका नाम ब्लैक बॉक्स रखा गया।

ब्लैक बॉक्स का इतिहास?

ब्लैक बॉक्स की इतिहास की बात करें तो इसका इतिहास लगभग 50 साल से भी ज्यादा पुराना है। 1950 के दशक में लगभग 1953-54 के बीच दिन-प्रतिदिन विमान के दुर्घटनाओं की वृद्धि को देखते हुए एयरोनॉटिकल एक्सपर्ट्स ने विमान में एक ऐसे उपकरण को लगाने के बारे में सोचा जो विमान हादसा हो जाने के बाद किसी की जान ना बचने के वावजूद भी बहुत हद तक घटनाओं के बारे में पता लगाने में मदद कर सके ताकि पिछली खामियां को सुधारकर भविष्य में होने वाले हादसों से बचा जा सके। इसी को देखते हुए एक ऐसे डाटा रिकॉर्डर उपकरण का निर्माण किया गया जिसका नाम “ब्लैक बॉक्स” दिया गया। 1954 में सबसे पहला ब्लैक बॉक्स को हवाई जहाज में लगाया गया इसके बाद समय के साथ इसकी बनावट में बदलाव आते रहे हैं।

ब्लैक बॉक्स का आविष्कार किसने किया?

ब्लैक बॉक्स का आविष्कार एरोनॉटिकल रिसर्च लेबोरेटरी के Australian वैज्ञानिक डॉ डेविड वारेन (Dr. David Warren) ने 1953 ई. में किया था।

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Conclusion (निष्कर्ष):
फ्रेंड्स हमें उम्मीद है की हमारे द्वारा ब्लैक बॉक्स के बारे में लिखी गयी इस आर्टिकल के माध्यम से आपको ब्लैक बॉक्स से सम्बंधित कई सारे सवालों का जबाब मिल गया होगा फिर भी किसी प्रकार की कोई समस्या रह गयी हो तो कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। यह आर्टिकल आपको कैसी लगी इसकी प्रतिक्रिया कमेंट के माध्यम से देना ना भूलें साथ ही अगर यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो अपने फ्रेंड सर्किल में शेयर जरुर करें। Comtech In Hindi से जुड़े रहने के लिए....धन्यवाद आपका दिन शुभ हो !
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