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VPN क्या है? VPN kya hai? जानिए सबकुछ यहाँ पर?

VPN क्या होता है? VPN kya hota hai? आइये आज हमलोग जानते है VPN के बारे में सब कुछ हिंदी में?

फ्रेंड्स जब भी कंप्यूटर नेटवर्क में या इन्टरनेट की दुनिया में सिक्योरिटी और प्राइवेसी की बात आती है तब एक नाम जरुर आता है वो है "VPN" जिसका पूरा नाम होता है Virtual Private Network, और शायद हम में से ज्यादातर लोग VPN का नाम जरुर सुने होंगे, पर क्या आपको पता है की ये VPN होता क्या है, VPN कैसे काम करता है, VPN इन्टरनेट में आपकी डाटा को कैसे छुपाता है। अगर ऐसे सवालों को ढूंढते हुए यहाँ तक आयें है तो आप सही जगह है क्योंकि आज हमलोग इस टॉपिक में VPN के बारे में ही चर्चा करने जा रहे है इसलिए आपसे आग्रह है की पूरी आर्टिकल को ध्यानपूर्वक पढ़ें....

VPN क्या है? VPN kya hai?

vpn kya hai?
VPN जिसका पूरा नाम होता है Virtual Private Network, अगर VPN के तीनो टर्म Virtual, Private और Network को अलग करके समझने का प्रयास करें तो Virtual जिसका मतलब होता है काल्पनिक या आभासी यानि जो वास्तविक में एक्सिस्ट नहीं करता हो केवल काल्पनिक रूप से शामिल हो रहा हो, Private जिसका मतलब होता है निजी यानि जिसपर सब का अधिकार नहीं हो और Network जिसका मतलब होता है दो या दो से अधिक कंप्यूटर का आपस में कम्युनिकेशन होना। इस प्रकार VPN का पूरा मतलब होता है एक ऐसा प्राइवेट नेटवर्क जिसका उपयोग काल्पनिक रूप से किसी निजी कार्यों के लिए किया जा रहा हो, और वास्तव में VPN एक निजी नेटवर्क ही होता है जो इन्टरनेट की दुनिया में क्लाइंट यानि उपयोगकर्ता को सिक्योरिटी तथा प्राइवेसी की सर्विस देने का काम करता है।

ऐसे में VPN के बारे में हम इस प्रकार से कह सकते है की....

VPN एक ऐसा प्राइवेट नेटवर्क है जो बगैर वास्तविक रूप से शामिल हुए पब्लिक नेटवर्क यानि इन्टरनेट में एक नेटवर्क से दुसरे नेटवर्क के बीच ट्रान्सफर हो रही आपकी डाटा को काल्पनिक रूप से (Virtually) छुपाकर सिक्यूरिटी तथा प्राइवेसी प्रदान करने का काम करता है उसे VPN कहा जाता है। VPN के माध्यम से ट्रान्सफर हो रही डाटा इन्टरनेट में किसी भी Third Party Tracker के नजर से दूर रहते है क्योंकि जब इन्टरनेट में VPN का इस्तेमाल करके कोई डाटा पैकेट ट्रान्सफर हो रही होती है तो पब्लिक नेटवर्क में ही वर्चुअली एक प्राइवेट टनल या कहें तो प्राइवेट रूट के माध्यम से डाटा पास होती है जिस कारण इसकी डाटा थर्ड पार्टी की नजर से दूर होती है।

वीपीएन आपके इंटरनेट में ट्रैफ़िक को एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करके ट्रैफिक को नियंत्रित करता है। यह ट्रैफिक को एन्क्रिप्ट करते समय आपके IP Address और Physical Location को छुपाता हैं ताकि VPN Service Provider के अलावा यह कोई न बता सके कि आप कौन हैं, आप कहां हैं या आप ऑनलाइन क्या कर रहे हैं। यह इंटरनेट के माध्यम से ऑन-डिमांड प्राइवेट टनल है।

VPN का क्या काम होता है? VPN ka kya kaam hota hai?

वैसे तो ज्यादातर सामान्य लोगों को VPN के बारे में केवल इतना पता होता है की VPN इन्टरनेट में आपकी पहचान और वास्तविक लोकेशन छुपाने का काम करता है जिस कारण ज्यादातर लोगों को लगता है की यह एक अवैध काम है और इसका इस्तेमाल गलत कार्यों के लिए किया जाता है, जबकि वास्तविक में ऐसा नहीं है यह एक लीगल चीज है, इसके माध्यम से किये जा रहे कार्य Illegal अर्थात गैरकानूनी हो सकते है यह वास्तव में इन्टरनेट में आपकी प्राइवेसी को बढ़ाने का काम करता है लेकिन कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल करते है।

VPN के कार्य की बात करें तो इसका मुख्य काम होता है यूजर और इन्टरनेट के बीच एक सुरक्षित कनेक्शन स्थापित करना तथा इन्टरनेट में किसी दो नेटवर्क के बीच एक सुरक्षित प्रोटोकॉल के माध्यम से एक दुसरे के बीच डाटा ट्रान्सफर करना।

इसके कुछ महत्वपूर्ण काम है जैसे:-

यह अपने इंटरनेट कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करके और आपके वास्तविक IP Address को एक नए IP Address के पीछे छिपाकर आपको इन्टरनेट में प्रस्तुत करते है।

यह पब्लिक नेटवर्क में एक प्राइवेट वर्चुअल रूट बनाकर डाटा सेंड-रिसीव करवाता है इसलिए यह सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर भी अपना डेटा सुरक्षित रखता है।

यह आपके वास्तविक लोकेशन और IP Address को छुपाने का काम करता है, इसलिए यह क्षेत्रीय सामग्री ब्लॉक अर्थात किसी खास लोकेशन में कोई Blocked Content पर भी Access बनाने में सक्षम बनाता है तथा किसी खास नेटवर्क में Blocked Website तक भी पहुँच बनाने की अनुमति देता है।

इंटरनेट सेंसरशिप को बायपास करने का काम करता है अर्थात जहाँ कहीं भी किसी के द्वारा इंटरनेट सेंसरशिप लागु किया जाता है उसे VPN के द्वारा बायपास किया जा सकता है।

चूँकि यह आपके वास्तविक IP Address और Physical Location को किसी दूसरे IP Address और Location से रिप्लेस करके आपकी पहचान छुपाता है इसलिए यह IP Tracking तथा ISP के द्वारा Tracking को रोकने का काम करता है।

किसी कंपनी के दूरस्थ श्रमिकों को कॉर्पोरेट नेटवर्क से जोड़कर एक सुरक्षित रूट प्रदान करने का काम करता है ताकि पब्लिक नेटवर्क में भी उसकी प्राइवेसी बनी रहे और प्राइवेट डाटा थर्ड पार्टी ट्रैकर की नजर से दूर रहे, कई कंपनियां अभी भी इस उद्देश्य के लिए वीपीएन का उपयोग करती हैं।

VPN कैसे काम करता है? VPN kaise kaam karta hai?

जैसा की हम सब जानते है कि सामान्य तौर पर जब भी हम इन्टरनेट का इस्तेमाल करते है तो हम पूरी तरह पब्लिक नेटवर्क पर निर्भर रहते है जिसमे हमें पब्लिक इन्टरनेट या नेटवर्क में मौजूद सिक्योरिटी तथा सर्विस मिलती है और यहाँ हमें उस नेटवर्क प्रोवाइडर के रेस्ट्रिक्शन के अनुकूल काम करना पड़ता है साथ ही हम सभी को पता है कि पब्लिक इन्टरनेट में डाटा हैकिंग-ट्रैकिंग का खतरा भी बना राहता है क्योंकि किसी भी पब्लिक नेटवर्क में जब दो डिवाइस के बीच या कहें तो दो नेटवर्क के बीच डाटा ट्रान्सफर हो रही होती है तो वे डायरेक्ट पब्लिक नेटवर्क से होकर जा रही होती है जिस कारण ये डाटा सब की नजर में रहता है जिसे हैकिंग-ट्रैकिंग करना आसान होता है।
VPN kaise kaam karta hai?

जबकि एक वीपीएन का इस्तेमाल करने पर पब्लिक नेटवर्क यानि इन्टरनेट में होते हुए भी दो डिवाइस के बीच या दो नेटवर्क के बीच डाटा को डायरेक्टली ट्रान्सफर ना करके आपके द्वारा सिलेक्टेड VPN Server के माध्यम से डाटा ट्रान्सफर होने देती है जिस कारण VPN उपयोग के दोरान एक एन्क्रिप्टेड टनल या कहें तो सिक्योर रूट बन जाती है जिससे आपके सभी इंटरनेट ट्रैफ़िक (डाटा) एक प्राइवेट रूट से होकर गुजरती है। इसके लिए VPN कई तरह के एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल का उपयोग करती है इसलिए यहाँ हमें अपने अनुसार सुरक्षा मिलती है और हमारे प्राइवेट डाटा थर्ड-पार्टी हैकर-ट्रैकर के नजर से दूर रहती है। यह आपके आईपी पते को छुपाता है और आपके डेटा को सुरक्षित रखता है साथ ही दूसरों को इसे इंटरसेप्ट करने से रोकता है।

वीपीएन के बिना इन्टरनेट में आपकी एक्टिविटी और डाटा आपके इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP), सरकार, विज्ञापनदाता या आपके नेटवर्क पर अन्य लोगों के लिए संभावित रूप से उजागर होते हैं। इसलिए वीपीएन कनेक्शन आपकी ऑनलाइन गोपनीयता और सुरक्षा को बढ़ाते हैं।

इस तरह से कह सकते है कि वीपीएन एक फिल्टर की तरह काम करता है जो आपके सभी डेटा को "अस्पष्ट" में बदल देता है और दूसरों की पहुँच से दूर रखता है, यहां तक कि अगर कोई आपके डेटा पर अपना एक्सेस बनाता भी है तो यह उसके लिए बेकार होगा।

वीपीएन एन्क्रिप्शन क्या है? VPN encryption kya hai?

वीपीएन एन्क्रिप्शन आपके डेटा को पब्लिक नेटवर्क के माध्यम से यात्रा करने के लिए एक सुरक्षित सुरंग बनाने के लिए डेटा एन्क्रिप्शन (एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल) का उपयोग करने की प्रक्रिया है। यदि कोई आपके वीपीएन कनेक्शन की जांच करता है तो उन्हें स्कैम्बल डेटा दिखाई देगा। VPN के माध्यम से ट्रांसफर हो रही आपका डाटा केवल आपका डिवाइस और आप जिस वीपीएन सर्वर का उपयोग कर रहे हैं वे ही आपके डेटा को एन्क्रिप्ट और डिक्रिप्ट, या अनस्क्रैबल कर सकता है।

डाटा एन्क्रिप्शन के लिए कई तरह के एन्क्रिप्शन विधियाँ या एल्गोरिदम मौजूद हैं, हालाँकि अधिकांश वीपीएन 256-बिट एईएस (Advanced Encryption Standard) एल्गोरिथ्म का उपयोग करते हैं। यह एन्क्रिप्शन का यह स्तर इतना सुरक्षित है कि इसका उपयोग दुनिया भर के बैंकों और सरकारों द्वारा किया जाता है।

वीपीएन प्रोटोकॉल क्या हैं? VPN protocol kya hai?

एक वीपीएन प्रोटोकॉल नियमों या निर्देशों का समूह है जो आपके डिवाइस और वीपीएन के प्रॉक्सी सर्वर के बीच संबंध बनाता है। प्रत्येक वीपीएन प्रोटोकॉल एन्क्रिप्शन विधियों और ट्रांसमिशन प्रोटोकॉल का एक संयोजन है। आप अपने वीपीएन ऐप की सेटिंग में अपना वीपीएन प्रोटोकॉल बदल सकते हैं।

VPN के लिए कई तरह के Protocol होते है जैसे:-

Open VPN Protocol:

Open VPN प्रमुख VPN प्रोटोकॉल में से एक है जो सुरक्षा और गति के लिए लोकप्रिय है। यह 256 Bit एन्क्रिप्शन का उपयोग करता है तथा Key Exchange के लिए SSL/TSL के साथ एक Custom Security Protocol का उपयोग करता है और सुरक्षित पॉइंट-टू-पॉइंट या साइट-टू-साइट कनेक्शन बनाता है। यह एक ओपन-सोर्स वीपीएन प्रोटोकॉल है, इसका सोर्स कोड किसी को भी सत्यापित करने के लिए उपलब्ध है।

इसमें यदि शोषक कमजोरियां पाई जाती हैं तो उन्हें डेवलपर्स के समुदाय द्वारा जल्दी से फिक्स किया जाता है जो इसका समर्थन करते हैं। ओपन-सोर्स कोड का उपयोग करने वाले वीपीएन कनेक्शन किसी को भी यह सत्यापित करने की अनुमति देते हैं कि डेवलपर्स स्वयं कुछ भी संदिग्ध नहीं कर रहे हैं।

IPsec/IKEv2 Protocol:

IKEv2 (Internet Key Exchange Version-2) एक कुशल प्रोटोकॉल है जिसे Microsoft और Sisco के द्वारा तेज, स्थिर और सुरक्षित होने के लिए विकसित किया गया था। इसे आमतौर पर सुरक्षा के लिए IPsec प्रोटोकॉल के साथ जोड़ा जाता है। OpenVPN की तरह, IKEv2 256-बिट एन्क्रिप्शन का उपयोग करता है, और दोनों तेज़ कनेक्शन प्रदान कर सकते हैं। IKEv2 मोबाइल उपकरणों के साथ विशेष रूप से लोकप्रिय है क्योंकि यह आसानी से मोबाइल डेटा और वाई-फाई नेटवर्क के बीच स्विच कर सकता है। लेकिन OpenVPN के तरह यह ओपन-सोर्स नहीं है।

WireGuard Protocol:

WireGuard एक नया ओपन-सोर्स वीपीएन प्रोटोकॉल है जो अत्याधुनिक क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करता है और इसका उद्देश्य मौजूदा वीपीएन प्रोटोकॉल जैसे IPsec और Open VPN को बेहतर बनाना है। यह मूल रूप से लिनक्स कर्नेल के लिए जारी किया गया था, लेकिन अब क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म है और इसे व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है, हालांकि वायरगार्ड अभी भी Under Development है।

L2TP:

L2TP (Layer 2 Tunnling Protocol) को Microsoft और Sisco द्वारा PPTP के उत्तराधिकारी के रूप में विकसित किया गया था (नीचे चर्चा की गई है)। वीपीएन कनेक्शन बनाने के लिए जिम्मेदार, L2TP को अक्सर सुरक्षा के लिए IPsec के साथ जोड़ा जाता है।

PPTP:

PPTP (Point-To-Point Tunnling Protocol) एक अप्रचलित और बहुत कम सुरक्षित प्रोटोकॉल है जो अभी भी मुफ्त वीपीएन सेवाओं के साथ लोकप्रिय है। जबकि अधिक उन्नत विकल्पों की तुलना में इसे स्थापित करना आसान है, PPTP ज्ञात सुरक्षा खामियों से भरा है और यदि आप एक सुरक्षित कनेक्शन की तलाश में हैं तो इससे बचना चाहिए।

VPN कितने प्रकार के होते है? VPN kitne prakar ke hote hai?

कार्य के आधार पर VPN मुख्यतः दो प्रकार के होते है:-

Remote Access VPN:

रिमोट एक्सेस वीपीएन लोगों को एक निजी नेटवर्क से जुड़ने और इसके सभी संसाधनों और सेवाओं को दूरस्थ रूप से एक्सेस करने की अनुमति देता है। रिमोट एक्सेस वीपीएन आवासीय और व्यावसायिक दोनों उपयोगकर्ताओं के लिए फायदेमंद है।

कार्यालय से दूर रहते हुए एक कॉर्पोरेट कर्मचारी अपने नियोक्ता के निजी नेटवर्क से जुड़ने और निजी नेटवर्क पर फ़ाइलों और संसाधनों को दूरस्थ रूप से एक्सेस करने के लिए रिमोट एक्सेस वीपीएन का उपयोग करता है।

Site-to-Site VPN:

एक साइट-टू-साइट वीपीएन, जिसे राउटर-टू-राउटर वीपीएन के रूप में भी जाना जाता है, बड़े निगमों में व्यापक रूप से उपयोग में लिए जाते है। साइट-टू-साइट वीपीएन का उपयोग व्यवसायों और संगठनों द्वारा अपने अलग-अलग स्थानों के ब्रांच को एक प्राइवेट नेटवर्क से जोड़ने के लिए किया जाता है।

साइट-टू-साइट वीपीएन दो प्रकार के होते है-

Intranet-based VPN − वीपीएन के इस रूप का उपयोग तब किया जाता है जब एक ही संगठन के कई कार्यालय साइट-टू-साइट वीपीएन तकनीक का उपयोग करके जुड़े होते हैं।

Extranet-based VPN − एक्स्ट्रानेट-आधारित वीपीएन का उपयोग तब किया जाता है जब कोई फर्म किसी अन्य संगठन के कार्यालय से जुड़ने के लिए साइट-टू-साइट वीपीएन प्रकार का उपयोग करती है।

VPN यूज़ करने के फायदे? VPN use karne ke fayde?

VPN यूज़ करने के फायदे की बात करें तो इसके लिए मैं सबसे पहले बता देना चाहूँगा की इसके वास्तविक फायदे केवल वो ही हो सकते है जो आपके देश में या आपके उस स्थानों पर जहाँ आप रह रहें हो वहाँ के सरकारी नियम के अनुसार VPN के माध्यम से भी आपके द्वारा किये जा रहे कार्य क़ानूनी रूप से वैध हो क्योंकि यदि आप VPN के माध्यम से गैरकानूनी काम करते है तो वे आपके लिए बहुत ही ज्यादा नुकसानदायक हो सकते है, हालाँकि यहाँ हम जानकारी के लिहाज से कुछ पॉइंट को प्रस्तुत कर रहें है जैसे....

यह सार्वजनिक वाई-फ़ाई नेटवर्क पर आपका डाटा सुरक्षित रखता है:

मुफ्त सार्वजनिक वाई-फाई की सुविधा अक्सर सुरक्षा के दृष्टिकोण से नुकसानदायक होती है क्योंकि ऐसे वाई-फाई नेटवर्क पर कोई भी इंटरनेट ब्राउज़िंग कर सकता है, इसलिए यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि किस समय कौन जुड़ा है या वे क्या कर रहे हैं। हैकर के लिए सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर बैठना और उस पर बहने वाले सभी ट्रैफ़िक को रोकना आसान होता है।

यदि आप ऐसे नेटवर्क से अपने बैंक खाते में लॉग इन करते हैं, अपना ईमेल चेक करते हैं या सोशल मीडिया यूज़ करते हैं तो एक हैकर आपके लॉगिन क्रेडेंशियल को छीन सकता है। आपके द्वारा भेजे गए कोई भी संदेश या आपके द्वारा प्रेषित व्यक्तिगत डेटा को इंटरसेप्ट किया जा सकता है और ब्लैकमेल या पहचान की चोरी के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसलिए सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के जोखिम बहुत ही ज्यादा हैं।

परंतु जब हम एक VPN का इस्तेमाल करते है तो वीपीएन कनेक्शन आपके कम्युनिकेशन को अपने सर्वर के साथ एन्क्रिप्ट कर देता है, इसलिए सार्वजनिक नेटवर्क पर भी हमारी डाटा छिपाने की कोशिश करने वाला कोई भी व्यक्ति को हमारी डाटा केवल अस्पष्ट दिखाई देता है जिस कारण हमारी डाटा उसके लिए बेकार साबित होता है।

VPN की मदद से कहीं से भी स्ट्रीमिंग करने की आजादी मिलती है:

स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म दुनिया भर के विभिन्न देशों में विभिन्न तरह के स्ट्रीमिंग शो की सुविधा प्रदान करते हैं परन्तु कुछ देशों या जगहों पे ये बैन भी हो सकते है, इसे जियोब्लॉकिंग के रूप में जाना जाता है। इसको इस प्रकार से समझ सकते है की यदि आप विदेश यात्रा कर रहे हैं और घर से अपने पसंदीदा शो के साथ बने रहना चाहते हैं, तो ऐसा भी हो सकता है कि वे आपके वर्तमान स्थान पर वो सामग्री अनुपलब्ध हो, ऐसे में आप वहाँ पर भी VPN के माध्यम से अपनी लोकेशन चेंज करके उस शो का मजा ले सकते है।

VPN Blocked Website तक पहुँच बनाने में सक्षम बनाता है:

आप कई जगह देखें होंगे कि कुछ वेबसाइटें विशेष परिदृश्यों या स्थानों में अवरुद्ध (Blocked) होते हैं जैसे- स्कूल, कॉलेज या किसी ऑफिस में कई वेबसाइट ब्लॉक्ड होते है फिर भी वीपीएन आपको उस ब्लॉक्ड वेबसाइट पर पहुँच बनाने में सक्षम बना सकता है क्योंकि ये आपकी वास्तविक Address और Location को Virtually Change कर सकता है इसलिए ये आपको उस वेबसाइट पर भी पहुँच बना देता है जो उस स्थानों पर ब्लाक होता है।

सेंसरशिप से बचाता है:

कई देश इंटरनेट का उपयोग सीमित करते हैं। चीन गूगल और फेसबुक और उनकी सभी संबद्ध सेवाओं, जैसे जीमेल, गूगल मैप्स, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम को ब्लॉक कर देता है। एक वीपीएन कनेक्शन आपको सेंसरशिप ब्लॉक के आसपास उसी तरह ले जा सकता है जैसे यह सामग्री जियोब्लॉकिंग और वेबसाइट प्रतिबंधों को बाईपास करके ले जा सकता है।

आईएसपी ट्रैकिंग से बचाता है:

वीपीएन के बिना आपका आईएसपी (इंटरनेट सेवा प्रदाता) आपकी सभी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक कर सकता है। आपके द्वारा उपयोग की जाने वाली वेबसाइटें और सेवाओं की जानकारी रख सकता है।
बहुत से लोग यह नहीं समझते हैं कि आपके डेटा पर आपके ISP का कितना लाभ है। बहुत ऐसे आईएसपी हो सकते है जो आपकी डाटा को विज्ञापन नेटवर्क या डेटा ब्रोकर के साथ बेच सकता है जिससे आपकी प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए यहाँ VPN आपकी डाटा गोपनीयता को आक्रमण से बचाता है। चूंकि इसके द्वारा आपके डिवाइस का इंटरनेट कनेक्शन एन्क्रिप्ट किया जाता है, इसलिए आपका ISP ठीक से मॉनिटर नहीं कर सकता कि आप ऑनलाइन क्या कर रहे हैं ना ही वे आपका ब्राउज़िंग इतिहास देख सकते हैं।

VPN के नुकसान? VPN ke nuksan?

हमारे हित में बनाई गयी चाहे कोई भी साधन हो उसके फायदे के साथ-साथ नुकसान तो होता ही है इसी तरह VPN के भी कुछ नुकसान हो सकते है, हालाँकि VPN के नुकसान कम और फायदे ज्यादा होते है फिर भी इसके कुछ नुकसान जो ज्यादातर मामलों में देखा जा सकता है वे है:-

वीपीएन आपकी गति को कम कर सकता है:

चूँकि वीपीएन वीपीएन सर्वर के माध्यम से इंटरनेट से आपके कनेक्शन को फिर से रूट करता है और एन्क्रिप्ट करता है इसलिए आपकी कनेक्शन की गति थोड़ी कम हो सकती है। यही कारण है कि नए प्रदाता को आज़माते समय अपनी वीपीएन गति का परीक्षण करना महत्वपूर्ण है। हालाँकि अधिकांश सामान्य इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अंतर दिखाई नहीं देता है। फिर भी यह आपको प्रभावित कर सकता है जब आप कुछ ऐसा कर रहे हों जहाँ तेज़ कनेक्शन की आवश्यकता हो।

वीपीएन सभी देशों में कानूनी नहीं होते है इसलिए वहाँ इसके माध्यम से गैरकानूनी काम करने पर आप फंस सकते है:

वैसे तो अधिकांश देशों में वीपीएन का उपयोग कानूनी है और वास्तव में अधिकांश बड़ी कंपनियां और निगम अपनी सुरक्षा के रूप में एक वीपीएन का उपयोग करते हैं, हालांकि कुछ अपवाद भी हैं कुछ सरकारें उन चीजों पर पूर्ण नियंत्रण चाहती हैं जो उनके नागरिकों को इंटरनेट पर देखने को मिलती हैं। चूंकि एक वीपीएन का उपयोग सरकारी सेंसरशिप को बायपास करने के लिए किया जा सकता है इसलिए कुछ अधिनायकवादी देशों में इस उपकरण को अवैध बना दिया गया है।
चीन जैसे कुछ देशों में, आप केवल सरकार द्वारा अनुमोदित वीपीएन का उपयोग कर सकते हैं। जरूरी नहीं कि वीपीएन का उपयोग वहां अवैध हो, लेकिन वे इस पर नियंत्रण रखना चाहते हैं।
अब भारत में भी VPN को लेकर कड़े नियम बनाये गए है जिसको लेकर Ministry of Electronics and Information Technology के द्वारा सभी VPN Service Provider को निर्देश दिया गया है की वे सभी यूजर के सम्पूर्ण एक्टिविटी का Data पांच साल के लिए सुरक्षित रखे ताकि सरकार को जरुरत पड़ने पर उससे जानकारी प्राप्त किया जा सके ताकि अवैध और गैरकानूनी एक्टिविटी पर नियंत्रण पाया जा सके।

वीपीएन उपभोक्ताओं के लिए एन्क्रिप्शन की गुणवत्ता की जांच करना मुश्किल हो सकता है:

यह जांचना मुश्किल हो सकता है कि क्या आपकी वीपीएन प्रदाता वास्तव में वही एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल का उयोग करते हैं जो वे वादा करते हैं। ज्यादातर कंप्यूटर उपयोगकर्ता को क्रिप्टोग्राफी के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं होती है जिस कारण वे इसके गहराइयों को नहीं जान सकते है, इसका मतलब है कि आपका औसत वीपीएन उपयोगकर्ता नहीं जानता कि वीपीएन एन्क्रिप्शन कैसे काम करता है इसलिए वे यह भी नहीं जान सकते है कि हमारे VPN सर्विस प्रोवाइडर हमें अपनी डाटा पर कैसी एन्क्रिप्शन दे रही है।

वीपीएन के द्वारा तीसरे पक्ष को आपकी एक्टिविटी साझा करना:

वैसे तो ज्यादातर पेड VPN सर्विस प्रोवाइडर कंपनी अपने क्लाइंट की कोई भी जानकारी तीसरे पक्ष के साथ शेयर नहीं करने की गारंटी देती है फिर भी क्या पता ऐसा हो सकता है की कोई सर्विस प्रोवाइडर खासकर जो फ्री सर्विस देता हो वे ऐसा कर सकते है। इसलिए हमेशा जो इसकी गारंटी देता हो उसी का चयन करें।

वीपीएन इस्तेमाल के दोरान आप कनेक्शन टूटने का अनुभव कर सकते हैं:

जैसा की हम सब जान चुकें है की VPN उपयोग के दोरान हमारी सारी ट्रैफिक VPN Server से होकर रूट होता है इसलिए कई बार VPN Server डाउन हो सकता है जिससे हमारा कनेक्शन भी टूट सकता है, हालाँकि गुणवत्ता वाले वीपीएन प्रदाता बहुत कम ही इस समस्या का सामना करते हैं साथ ही कई प्रदाता बैकअप वाली सुविधा भी देती है जिससे ऐसी स्तिथि में पुनः कनेक्शन रिज्यूम किया जा सके।

मुफ्त वीपीएन उपयोग करना नुकसानदायक हो सकता है:

कई कंप्यूटर उपयोगकर्ता अपने लिए कई तरह के फ्री सर्विस का उपयोग करना चाहती है जो बाद में उनके लिए हानि का सौदा हो जाता है। कुछ लोग एक अच्छे और Paid VPN Service लेने से पहले मुफ्त में कई तरह के वीपीएन सेवा का ही उपयोग करने का प्रयास करते हैं, दुर्भाग्य से कई मुफ्त वीपीएन प्रदाता ऑनलाइन आपकी गोपनीयता और गुमनामी की रक्षा नहीं करते है बल्कि वे केवल पैसा कमाना चाहते हैं जिसके लिए वे आपकी डाटा तक को भी बेच सकते है जिससे आपकी प्राइवेसी भंग हो सकती है।

कई मुफ्त वीपीएन प्रदाताओं में डेटा सीमा, गति सीमा, विज्ञापन और डाउनलोड प्रतिबंध भी होते हैं, इन सीमाओं के कारण यहाँ हमें बेहतर सर्विस नहीं मिलती है। कई मुफ्त वीपीएन ऐप सुरक्षित नहीं होते हैं क्योंकि उसके फ़ाइल में स्पाइवेयर या मैलवेयर छिपे हुए हो सकते हैं जो इंस्टालेशन के पश्चात आपको नुकसान पहुंचा सकते है। इसलिए हमेशा इन सारी चीजों का ध्यान रखते हुए ही VPN का इस्तेमाल करना चाहिए।

एक अच्छे VPN का चयन कैसे करें?

वैसे तो इन्टरनेट पर बहुत सारे फ्री VPN सर्विस प्रोवाइडर मोजूद है परन्तु उनपर हम भरोसा नहीं कर सकते क्योंकि जो भी फ्री सर्विस प्रोवाइडर होते है वो आपको उतनी सुरक्षा नहीं दे पाते है। इसलिए हमेशा एक अच्छे और विश्वशनीय VPN का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

हम निम्नलिखित पेरामीटर पर एक अच्छे VPN सर्विस प्रोवाइडर का चयन कर सकते है जैसे-
  • जो आपकी प्राइवेसी का ख्याल रखता हो....
  • जो बेहतर एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता हो....
  • जो स्पीड अच्छी देती हो....
  • आपकी डाटा किसी तीसरे पक्ष के साथ शेयर नहीं करता हो....
  • जिसकी VPN Server आपके लोकेशन के नजदीक होने के साथ-साथ कई लोकेशन पर मोजूद होने की गारंटी देता हो....
  • जिसका इंटरफ़ेस User-Friendly हो....
  • जो अच्छी कस्टमर सपोर्ट प्रदान करता हो....
  • जिसकी चार्जेज यानि रेट कम हो पर सर्विस अच्छी देती हो....
ऐसे ही कई सारे पैरामीटर हो सकते है जो आपके हित में हो, उसे देखकर हम एक अच्छे VPN का चयन कर सकते है।

इन्हें भी देखें:→
👉Antivirus क्या है, जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.... 

Conclusion (निष्कर्ष):
फ्रेंड्स हमारे ओर से हमेशा प्रयास किया जा रहा है की हम आपके लिए एक बेहतर कंटेंट प्रस्तुत करें और शायद कर भी रहें है इसलिए हमें उम्मीद है की हमारे द्वारा VPN के बारे में लिखी गयी इस आर्टिकल के माध्यम से आपको बहुत कुछ जानने को मिला होगा, फिर भी किसी प्रकार की कोई कंफ्यूजन रह गयी हो तो कमेंट के माध्यम से बेझिझक पूछ सकते है। यह आर्टिकल आपको कैसी लगी इसकी फीडबैक कमेंट के माध्यम से जरुर दें ताकि इसकी गुणवत्ता का पता लग सके। अगर यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो अपने फ्रेंड सर्किल में शेयर जरुर करें। इसी तरह की और भी टेक्नोलॉजी से सम्बंधित आर्टिकल पढ़ते रहने के लिए Comtechinhindi.IN से जुड़े रहें....धन्यवाद!

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