End To End Encryption क्या होता है? End To End Encryption In Hindi?

End To End Encryption क्या होता है? End To End Encryption kya hota hai?

हम सभी लोग आज WhatsApp, Telegram, Signal, Messenger इत्यादि जैसे कई तरह के Messaging Service का इस्तेमाल कर रहे है चाहे वह Mobile Version में हो या Web Version में. जिसके माध्यम से हम सब एक दुसरे के साथ कई तरह के Textual Message के साथ-साथ Graphical Media इत्यादि भी शेयर करते है. इन Messaging प्लेटफार्म पर हम सभी एक दुसरे के साथ Hello, Hi जैसी सामान्य बातें तो हमेशा करते है पर कई बार हम सब अपनी प्राइवेट जानकारी भी एक दुसरे के साथ शेयर करते है जो खास अपने लोगों के लिए ही होता है.

पर क्या आपने कभी सोचा है कि आप मेसेज के साथ जो भी जानकारी अपने दोस्तों या अपने फॅमिली मेम्बर के साथ शेयर करते है क्या वह सुरक्षित है?, क्या इस जानकारी को बीच में कोई दूसरा नहीं पढ़ सकता? तो इसका पहला जबाब है- हाँ पढ़ सकता है, और दूसरा जबाब है- नहीं पढ़ सकता है.

हाँ उस कंडीशन में हो सकता है जब किसी Messaging Service में Standard Encryption Method का यूज़ किया गया हो और नहीं उस कंडीशन में हो सकता है जब किसी Messaging Service में End To End Encryption Method का यूज़ किया गया हो.

ऐसे में हम सभी को पता होना चाहिए की हमारे यहाँ जो भी पोपुलर Messaging Service है जैसे- WhatsApp, Telegram, Signal, Messenger, ये सभी यूजर की प्राइवेसी को बनाये रखने के लिए अपने Messaging System में End To End Encryption Method का यूज़ करती. अब बात आती है कि ये End To End Encryption है क्या तो आइये जानते है....

End To End Encryption क्या है?

End To End Encryption In Hindi

End To End Encryption हमारे Messaging या Communication सिस्टम में ट्रान्सफर की जानीवाली डाटा को नेटवर्क में प्रोटेक्ट यानि सुरक्षित करने का एक Method है जिसकी मदद से Messaging के दौरान एक दुसरे के साथ शेयर किये जानेवाले जानकारी को सुरक्षति रखा जाता है, जिससे यूजर की प्राइवेसी बनी रहती है.

यह उस Encryption Method से अलग है जो केवल आपके Device और Server के बीच Transfer होनेवाले डाटा को प्रोटेक्ट करने का काम करता है. End To End Encryption सिस्टम एक ऐसा मेथड है जिसके अंतर्गत भेजे जानेवाले Content को केवल Sender और Receiver ही पढ़ सकता है तीसरा कोई भी नहीं. क्योंकि इसमें जिस Encryption Algorithm की मदद से Data Encrypt होता है उसको Decrypt करने की चाभी केवल Message (Data) Receiver के पास ही होता है.

इसमें कोई भी कंटेंट जब Encrypted Form में होती है तब वह कंटेंट सामान्य रूप (Plaintext) में ना रहकर Random Characters में तब्दील हो जाता है जिसे Ciphertext कहा जाता है. Ciphertext को तब तक कोई नहीं पढ़ सकता जब तक इसे Special Key से Decrypt करके फिर Plaintext में कन्वर्ट ना किया जाय.

उदाहरण के तोर पर यदि आप किसी ऐसी Messaging Service का इस्तेमाल करते हैं जो End To End Encryption की सुविधा देती जैसे- WhatsApp, Telegram, Signal, Messenger तो आपके द्वारा भेजे जानेवाले Message (Content) को Receiver (जिसे भेजा गया हो) के अलावा बीच में कोई भी नहीं पढ़ सकता है चाहे वह Hacker हो या Communication की सुविधा देनेवाली कंपनी या Government या कोई अन्य.

नोट- हर एक Messaging Service में ये जरुरी नहीं है कि उसमे By Default ही आपको . End To End Encryption की सुविधा मिले. कुछ में हमें इस सुविधा को दिए गए सेटिंग के अनुसार Active करना पड़ता है. जैसे- WhatsApp और Signal में हमें अब तक By Default End To End Encryption की सुविधा मिलती है जबकि Telegram में हमें Secret Chat और Messenger में Secret Conversesion Option में जाकर Chatting करने पर हमें ये सुविधा मिलती है.

End To End Encryption कैसे काम करता है?

End to End encryption system block diagram
End To End Encryption Method में Asymmetric Encryption Algorithm का यूज़ किया जाता है जिसमे Data Encryption और Decryption के लिए दो अलग-अलग Cryptography Key का उपयोग किया जाता है जिसे Public Key और Privet Key कहा जाता है.

Asymmetric Encryption Algorithm में Public Key का उपयोग Data Encryption के लिए होता है और Private Key का उपयोग उस Data का Decrypt करने के लिए किया जाता है.

End To End Encryption सिस्टम के तहत भेजा जानेवाला मेसेज डाटा Receiver (प्राप्तकर्ता) के Public Key से Encrypt होता है और Receiver के ही Private Key से Decrypt होता है और पूरी नेटवर्क में यह Private Key केवल Receiver के पास होता है, इसलिए दूसरा कोई डिक्रिप्ट कर ही नहीं सकता.

इसको एक उदहारण से समझते है:- कोई एक राम नाम का लड़का WhatsApp के जरिये अपने दोस्त श्याम को मेसेज भेज रहा है तो राम के द्वारा लिखा जानेवाला मेसेज श्याम के ही Public Key से Encrypt होगा और जब वह मेसेज श्याम को मिलेगा तो श्याम के Private Key से Decrypt हो जायेगा. फिर अगर श्याम राम को कुछ Reply Message देना चाहता है तो श्याम के द्वारा लिखा जानेवाला Reply Message राम के Public Key से Encrypt होगा और वह मेसेज जब राम को मिलेगा तो राम के Private Key से Decrypt हो जायेगा. हालाँकि ये Encryption- Decryption की प्रक्रिया Automatics चलती रहती है.

End To End Encryption के फायदे?

  • End To End Encryption के फायदे की बात करें तो इससे सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस एन्क्रिप्शन मेथड के तहत भेजे जानेवाले डाटा केवल Sender और Receiver ही समझ सकता है....
  • इसके तहत हमारी व्यक्तिगत प्राइवेसी बनी रहती है....
  • इस एन्क्रिप्शन मेथड से नेटवर्क में हमारी डाटा पूरी तरह सुरक्षति रहता है....
  • अगर कोई डाटा इस एन्क्रिप्शन मेथड से एन्क्रिप्ट किया गया हो और किसी के हाथ भी लग जाये तो वे हमारी डाटा को समझ नहीं सकता....
  • इस एन्क्रिप्शन मेथड के तहत हम अपनी प्राइवेट डाटा किसी के साथ शेयर कर सकते है....
  • End to End Encryption के हानियाँ?
  • End To End Encryption की सबसे बड़ी हानियाँ यह है कि इसका नाजायज फायदा छोटे-बड़े अपराधी अपराध को अंजाम देने के लिए उठा लेते है.....
  • इस एन्क्रिप्शन मेथड का उपयोग जिस भी कम्युनिकेशन सिस्टम में किया जाता है उससे आतंकी गतिविधि को बढ़ावा मिलता है.....
  • इसमें जानकारी केवल Sender और Receiver के बीच रहने के कारन इससे अवैध कारोबारी को बढ़ावा मिलता है....
  • End To End Encryption होने के कारन इसके तहत एक दुसरे के साथ शेयर होनेवाली जानकारी जब Service Provider के पास भी नहीं होती है तो इससे सीधा मतलब है यह जानकारी विशेष परिस्थति में गवर्मेंट को भी नहीं मिल पायेगी, जो एक बड़ी समस्या है. हालाँकि इन समस्याओं का हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अवैध एक्टिविटीज को रोका जा सके और कुछ जानकारी गवर्मेंट के साथ शेयर हो सके.

Conclusion (निष्कर्ष):
फ्रेंड्स हमें उम्मीद है की हमारे द्वारा लिखी गयी इस आर्टिकल के माध्यम से आपको End To End Encryption के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा. फिर भी किसी प्रकार की कोई कंफ्यूजन रह गयी हो तो कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है.
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