हार्ड डिस्क क्या है | Hard Disk Kya Hai | HDD Kya Hai?

Hard Disk या Hard Disk Drive क्या है, पूरी जानकारी हिंदी में....

Hard Disk Kya Hai

हार्ड डिस्क क्या है? What is hard disk, in hindi?

Hard Disk जिसे Hard Drive या Hard Disk Drive (HDD) भी कहा जाता है, यह एक Data Storage डिवाइस होता है, जिसमे डाटा स्थाई रूप से सुरक्षित रहता है। इसलिए इसे Permanent Storage Device कहा जाता है। 

कंप्यूटर के लिए यह Secondary Memory होता है जिसमे Operating System, Application Software तथा Save की गयी सारी Data स्थायी रूप से Store रहता है। परंतु इसका इस्तेमाल केवल कंप्यूटर में ही नहीं बल्कि Surveillance System इत्यादि में भी किया जाता है। इसकी डाटा स्टोरेज कैपेसिटी बहुत ही ज्यादा (Tera Byte में) होती है।
यह एक Non-Volatile Memory है (नहीं भूलने वाला) क्योंकि इसमें Save की हुई डाटा Power Off हो जाने के बाद भी नहीं मिटता है अर्थात ज्यों की त्यों बानी रहती है।

हार्ड डिस्क (हार्ड डिस्क ड्राइव) कितने प्रकार के होते है? Types of hard disk, in hindi?

कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के आधार पर Hard Disk तीन प्रकार के होते है:-

PATA (Parallel Advanced Technology Attachment):-

यह सबसे पुरानी तकनीक की हार्ड ड्राइव है जिसका उपयोग पहली बार 1986 में किया गया था। इस Hard Drive को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए PATA Interface Standard का उपयोग किया जाता है, जिसके कनेक्टर 40 Pin की होती है। जिसे IDE (Integrated Drive Electronics) के नाम से भी जाना जाता है। इसमें Parallel Communication तकनीक पर Data Transfer होता है फिर भी इसकी अधिकतम Data Transfer Speed 133MB/s ही है।
वर्तमान में PATA Hard Drive का उपयोग नहीं के बराबर किया जाता है आज इसका स्थान SATA Hard Drive ने ले लिया है।

SATA (Serial Advanced Technology Attachment):- 

यह आज के अधिकतर कंप्यूटर और लैपटॉप में उपयोग किया जानेवाला Hard Drive है जिसमे डाटा ट्रांसफर के लिए Serial Communication तकनीक का सहारा लिया गया है, इसकी अधिकतम Data Transfer Speed 600 Mb/s तक होती है। इसकी स्पीड PATA HDD की उपेक्षा अधिक होती है। इसमें डाटा कम्युनिकेशन के लिए SATA Cable का उपयोग किया जाता है, जिसके कनेक्टर में केवल 7 Pin होती है।
लगभग सभी Consumer Level लेपटॉप, डेस्कटॉप इत्यादि में इसी हार्ड ड्राइव का उपयोग किया जाता है।

SAS (Serial Attached SCSI-Small Computer System Interface):-

यह Server में उपयोग किया जानेवाला Hard Drive है जिसकी स्पीड तथा विश्वनीयता सबसे ज्यादा होती है। इसमें भी पहले Parallel Communication का सहारा लिया जाता था फिर Serial Communication का सहारा लिया गया। ऊपर से देखने में यह SATA HDD के जैसा ही होता है परंतु इसकी ताकत उससे कई गुणा ज्यादा होती है।
जब इसका इस्तेमाल सर्वर में किया जाता है तो इसका सीधा मतलब है कि यह 24*7 लगातार चलने की ताकत रखता है, इसकी स्टोरेज क्षमता ज्यादा होती है, यह उच्च टेम्प्रेचर में भी कार्य करने की क्षमता रखता है, इसकी स्पीड Consumer HDD से ज्यादा होती है।

Note:- कुछ लोग SSD को भी Hard Disk Drive के Category में ही शामिल कर देते है पर वास्तव में वह Hard Disk Drive ना होकर Solid State Drive है जिसकी तकनीक HDD से बिलकुल ही अलग है।
  

हार्ड डिस्क के आंतरिक पार्ट्स? Internal parts of hard disk, in hindi?

Internal Parts Of HDD
  • Platter (Magnetic Disk):- यह हार्ड ड्राइव में पाए जानेवाला एक सर्कुलर नुमा Disk होता है जो आमतौर पर एल्यूमीनियम, ग्लास या सिरेमिक सब्सट्रेट का उपयोग करके बनाया जाता है, इसके दोनों ओर Ferromagnetic Material का कोटिंग किया गया होता है, इसलिए इसे Magnetic Disk भी कहा जाता है। यह हमेशा एक स्पिंडल मोटर की सहायता से घूमते रहता है। यह एक फिजिकल पार्ट होता है जिसपर पर बने लॉजिकल सेक्टर में Read/Write Head के द्वारा Data Read/Write होता है।
  • Spindle Motor:- यह हार्ड ड्राइव में पाए जानेवाला एक छोटा सा इलेक्ट्रिक मोटर होता है जो जिसकी अधिकतम स्पीड 5400 या 7200 RPM होती है। इसी पर Platter लगे होते है जो वर्किंग के दौरान Platter को हमेशा Rotate करवाने का काम करता है। इसकी स्पीड हमेशा एक समान नहीं होती है बल्कि Data Read/Write Speed के आधार पर इसकी भी गति हार्ड ड्राइव में लगे Logic Board के द्वारा कण्ट्रोल होती रहती है।
  • Actuator:- यह हार्ड ड्राइव का एक ऐसा Mechanism है जो Actuator Arm को लगातार मूवमेंट करवाने का काम करता है।
  • Actuator Axis:- यह एक धुरी होती है जिसमे Actuator Arm लगी होती है। यह केवल Actuator Arm को स्थिरता प्रदान करता है जिससे आर्म का किसी एक अक्ष पर ही मूवमेंट हो सके।
  • Actuator Arm:- यह घड़ी की सुई के सामान लंबा एक पार्ट होता है जिसे Actuator Arm कहा जाता है। इसी के एक सिरे पर Read/Write Head लगे होते है। इसका मुख्य काम होता है जरुरत के अनुसार Head को Left-Right मूवमेंट करवाना।
  • Read/Write Head:- यह Actuator Arm से जुड़ा एक छोटा सा पार्ट होता है जिसका मुख्य काम होता है Platter पर Data Write करना तथा Platter से Data Read करना। इसकी Connectivity एक Ribbon Cable के माध्यम से Logic Board के साथ होती है। इसी के द्वारा Digital Data का लेन-देन Hard Disk से किया जाता है।
  • Logic Board:- यह Hard Drive में लगा हुआ एक PCB होता है जिसमे चिप, कॉम्पोनेन्ट इत्यादि लगे होते है। यह हार्ड ड्राइव में आनेवाली तथा हार्ड ड्राइव से जानेवाली डाटा को कंट्रोल करने का काम करता है। इसके अलावा यह पूरी हार्ड ड्राइव के सभी पार्ट को कंट्रोल करने तथा जरूरी सप्लाई भेजने का काम करता है।
  • Head Parking Area:- यह Head तथा Actuator Arm की सुरक्षा के लिए दिया गया होता है ताकि मूवमेंट के समय Head बहार की और ना आवे। यह Platter की अंतिम एरिया होता है जहाँ Head आकर रुकता है।
  • Ribbon Cable:- यह कनेक्टिविटी केबल होता है जिसके माध्यम से डाटा का कम्युनिकेशन Logic Board से Head तक होता है।
  • SATA Power Connector- यह 15 Pin का कनेक्टर होता है जिसमे SMPS से आनेवाली पॉवर कनेक्टर को जोड़ा जाता है जिससे HDD के लिए Required Power की आपूर्ति होती है।
  • SATA Cable:- यह 7 Pin का कनेक्टर होता है जिसमे डाटा कम्युनिकेशन के लिए कंप्यूटर मदरबोर्ड से आनेवाली SATA Cable को जोड़ा जाता है।

हार्ड डिस्क के कार्य? Usage of hard disk, in hindi?

वैसे सामान्य तौर पर हार्ड डिस्क के कार्य की बात करें तो इसका मुख्य काम डिजिटल डाटा को स्टोर करना ही होता है।
यदि कंप्यूटर में इसके अलग-अलग जिम्मेदारी की बात करें तो इसके मुख्यतः दो कार्य है-
  • सभी तरह के सॉफ्टवेयर जैसे- सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेर, डिवाइस ड्राइवर इत्यादि को Store रखना।
  • कंप्यूटर पर किये जानेवाली सभी तरह के कार्यों की फाइलों को सुरक्षित रखना।

हार्ड डिस्क में डाटा स्टोर कैसे होता है? How is data stored on hard disk, in hindi?

हमारे लिए कोई भी डाटा चाहे Text के Form में हो अथवा Graphic के Form में परंतु एक इलेक्ट्रॉनिक्स मशीन के लिए तो वह एक बाइनरी नंबर ही होता है। इसलिए कंप्यूटर के अंदर डाटा ट्रेवल की बात हो या प्रोसेसिंग की या स्टोरेज की कंप्यूटर के अंदर कोई भी डाटा Bit (0 और 1) के Form में ही रहता है। 

अब बात आती है कि कंप्यूटर के हार्ड डिस्क पर डाटा कैसे स्टोर होता है तो इसके लिए मैं बताना चाहूंगा कि हार्ड डिस्क जो एक फिजिकल पार्ट है उस पर भी डाटा Bit (0 और 1) के Form में ही स्टोर होता है। इसके लिए Hard Disk के Platter में Logical Structure बने होते है जिसमे Magnetic Concept की सहायता से डेटा सेव होता है।

अब बात करें इसके Logical Structure की तो इसकी स्ट्रक्चर कुछ इस प्रकार की होती है....
HDD Logical Structure
Platter की Surface (सतह) Logically कई हिस्सों में बंटा होता है। इसपर 360 डिग्री सर्किल नुमा आकार में कई सारे पाथ बने होते है जिसे Track कहा जाता है और इसी Track पर Read/Write Head मूव करता है, फिर यह सभी Track भी कई हिस्सों में बंटे होते है जिसे Sector कहा जाता है और वास्तव में इसी Sector पर Magnetic Concept की मदद से Data 0 और 1 के फॉर्म में स्टोर होता है। कई सारे Sector के Group को Cluster कहा जाता है, इसकी Size ऑपरेटिंग सिस्टम तथा हार्ड डिस्क की Size पर निर्भर करता है।

हार्ड डिस्क ड्राइव का इतिहास? History of hard disk drive, in hindi?

हार्ड डिस्क ड्राइव की इतिहास की बात करें तो शुरुवात में HDD इतनी Develop नहीं थी। सबसे पहला हार्ड डिस्क ड्राइव सन 1956 में IBM के द्वारा बाजार में पेश किया गया था जिसे सामान्य रूप से मेनफ़्रेम और छोटे कंप्यूटर पर इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया था। जिसकी स्टोरेज कैपेसिटी लगभग 4MB तक ही थी। उस समय यह आकर में भी बहुत ही बड़ी थी साथ ही यह कंप्यूटर में बिल्‍ट-इन थी और रिमूवेबल नहीं थी। इसकी लगत भी बहुत ही ज्यादा थी।
धीरे-धीरे इसमें कई बदलाव हुए इसकी निर्माण भी कई कम्पनियों के द्वारा किया जाने लगा, इसकी आकर भी छोटी हुई, इसी लगत भी कम होती चली गई तथा इसकी इसकी स्टोरेज कैपेसिटी भी बढ़ता चला गया। आज के हार्ड डिस्क ड्राइव की बात करें तो इसकी आकर डेस्कटॉप के लिए 3.5 Inch तथा लैपटॉप के लिए 2.5 Inch है तथा इसी स्टोरेज कैपेसिटी की भी बहुत ही ज्यादा है कई TB (Tera Byte) तक की एक Single HDD भी उपलब्ध है। 

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